Machine Translator

ग़ालिब के अंदाज

रामपुर

 17-02-2018 11:52 AM
ध्वनि 2- भाषायें

हिन्दुस्तान सा-ए-गुल पा-ए-तख्त था, जहाँ-ओ-जलाल-ए-अहद-ए-विश्वाल-ए-बुतन ना पूछ,, यह गालिब की 149 वीं बरसी है गालिब की कवितायें इतिहास के राजाओं के खंजरों की (जो की संग्रहालयों की शोभा बढ़ा रहें हैं) तरह उनकी कवितायें आज भी युवाओं से लेकर बुजुर्गों के शरीर में रक्त संचार की गति को तीव्र करने का कार्य करती हैं। गालिब 19वीं शताब्दी के मात्र एक शायर ही नहीं थे अपितु वे समाज के एक अमूल्य अंग थे जिसका प्रमाण उनकी शायरियों से मिल जाता है- पूछते हैं वो कि 'ग़ालिब' कौन है। कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या।। मीर तकी मीर का एक शेर– अश्क आँखों में कब नहीं आता। लहू आता हैं जब नहीं आता।। गालिब ने इसे और अधिक शानदार और यादगार बना दिया: 'रागोना में दौड़ते फ़िरने के हम नहीं कायल। जब आंख से ही नहीं टपका तो फिर लहू कया है।। यह उर्दू कविता की परंपरा के अनुरूप था, जहां आप एक पुराने उस्ताद द्वारा एक रेखा या शेर ले गए और नए मतलब को प्रदान करने के लिए इसे बदल दिये। इस परंपरा ने कई लोगों को आकर्षित किया। उर्दू गज़लों में एक अलग सी कशिश होती है जिसमें एक क़र्ज़ के प्रेरित अंदाज़ का एक नमूना है जिसे हम-रदीफ़ ग़ज़ल कहते है। इसमें एक ही 'रदीफ़' या शेर शब्द के दोहराने वाला तरीका शामिल है। लखनऊ के कवि अमीर मीनाई के गज़ल एक प्रसिद्ध उदाहरण है, जो ग़ालिब के समकालीन थे, जिन्होंने लिखा है: 'उसकी हसरत है जिसे दिल से मिटा भी न सकू। ढूँढने उसको चला हूँ जिसे पा भी न सकू।। ये ऐसा हैं अगर मीनाई का जवाब जो ग़ालिब ने लिखा, 'मेहरबान होके बुला लो मुझ चाहे जिस वक़्त। मै गया हुआ वक़्त नहीं हूँ कि फिर आ भी न सकू'।। ग़ालिब के शेर मात्र मुहब्बत को ही नही दिखाते बल्की ये हिंदू-मुस्लिम एकता को भी प्रदर्शित करते हैं, यही सुन्दरता ग़ालिब के शायरियों को एक अलग अंदाज से नवाजती है।



RECENT POST

  • पृथक स्थानों (isolating places) के रूप में देखे जा रहे गेटेड समुदाय (gated communities)
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     07-04-2020 05:00 PM


  • कोरोना का परिक्षण महत्वपूर्ण क्यूँ ?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     06-04-2020 03:40 PM


  • क्या सच में प्रकृति के लिए वरदान है, कोविड - 19 (Covid – 19)?
    व्यवहारिक

     05-04-2020 03:45 PM


  • दांतों के विकारों में काफी लाभदायक होता है मौलसिरी वृक्ष
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     04-04-2020 01:20 PM


  • आंवला शहर में है रोहिलखंड के पहले नवाब अली मुहम्मद खान की कब्र
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     03-04-2020 04:00 PM


  • मातृका का इतिहास और पूजन की मान्यता
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     02-04-2020 04:30 PM


  • रोहिल्ला के सम्मान में रखा गया था एस.एस. रोहिल्ला जहाज़ का नाम
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     01-04-2020 05:00 PM


  • मानव के मस्तिष्क में कैसे पैदा होता है भय?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     31-03-2020 03:45 PM


  • विश्व भर के लिए रोगवाहक-जनित बीमारियां हैं एक गंभीर समस्या
    व्यवहारिक

     30-03-2020 02:50 PM


  • जीवन और मृत्यु के साथ का एक रूप है, द लाइफ ऑफ़ डेथ
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     29-03-2020 05:00 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.