Machine Translator

आज़ादी के संघर्ष में मुहम्मद अली जौहर का योगदान

रामपुर

 26-01-2018 09:11 AM
उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

मुहम्मद अली जौहर का जन्म रामपुर में हुआ था। वे एक बहुमुखी पुरुष थे- कवि, देशभक्त, पत्रकार, वक्ता और राष्ट्रीय प्रसिद्धि के राजनीतिक नेता। भारत की आज़ादी के लिए वे कई बार जेल भी गए। महात्मा गाँधी के प्रोत्साहन के साथ उन्होंने भारत में ख़िलाफ़त आन्दोलन की शुरुआत की। और जहाँ तक बात है उनकी काव्यात्मक प्रतिभा की, तो वे मशहूर उर्दू शायर दाग़ देहलवी के कवि शिष्य थे।
रामपुर में संरक्षित चार बैत की काव्यात्मक संस्कृति के बीच पले बड़े मुहम्मद अली जौहर शब्दों के कारीगर थे। चार बैत 17वीं शताब्दी में मध्य-पूर्व में उत्पन्न हुआ, जहां एक आदिवासी सरदार एक प्रतिभाशाली सेना को गीतात्मक ललकार (चुनौती) लगाता था। एक तरह से यह कवियों के बीच रोमांस से राजनीति तक के मुद्दों पर गठित एक त्वरित हाज़िर जवाबी की प्रतियोगिता होती थी। चार बैत 1870 के दशक में रोहिल्ला के साथ अफगानिस्तान से भारत आया और रामपुर के दरबारों में अपना केंद्र स्थापित किया।
इस कवि परम्परा और अलीगढ़ विश्वविद्यालय (जो भारत के युवा मुसलमानों के लिए बौद्धिक वाद-विवाद का केंद्र बन चुका था) में निखरे मोहम्मद अली जौहर ने अब अंग्रेजी भाषा पर बेमिसाल पकड़ के साथ अंग्रेजी में तीक्ष्ण, उत्तेजक और शक्तिशाली भाषण और लेखन जारी रखा। एच.जी. वेल्स ने उनके बारे में लिखा: "मुहम्मद अली को मैकॉले की कलम, बर्क की जुबान और नेपोलियन का ह्रदय प्राप्त था”।
रद्द-ए-सहर ताकत-ए-परवाज़ ही जब खो चुके, फिर हुआ क्या गर हुए भी पर खुले। चाक कर सीने को, पहलू चीर डाल, यूंही कुछ हाल-ए-दिल-ए-मुज़तिर खुले। लो वो आ पहुंचा जुनून का काफ़िला, पाँव ज़ख़्मी, खाख मुंहपर, सर खुले। अब तो किश्ती के मुवाफिक है हवा, ना ख़ुदा, क्या देर है, लंगर खुले। ये नज़र-बंदी तो निकली रद्द-ए-सहर, दीदाहे होश अब जा कर खुले। फैज़ से तेरे ही, ऐ क़ैद-ए-फिरंग, बाल-ओ-पर निकले, क़फ़स के दर खुले। जीतेजी तो कुछ ना दिखलाया मगर, मर के जौहर आपके जौहर खुले।
प्रस्तुत चित्र मुहम्मद अली जौहर के जनाज़े का है। जौहर को जेरूसलम में दफनाया गया था क्योंकि उन्होंने उस भारत में दफन होने से इंकार कर दिया था जहाँ ब्रिटिश ध्वज लहरा रहा हो।



RECENT POST

  • कैसे पड़ा हिन्‍द महासागर का नाम भारत के नाम पर?
    समुद्र

     17-08-2019 01:54 PM


  • रामपुर नवाब के उत्तराधिकारी चुनाव का संघर्ष चला 47 साल तक
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     16-08-2019 05:47 PM


  • अगस्त 1942 को गोवालिया टैंक मैदान में ध्वजारोहण के बाद की अनदेखी छवियाँ
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     15-08-2019 08:16 AM


  • सहयोग व रक्षा का प्रतीक हैं पर्यावरण अनुकूलित हस्तनिर्मित राखियां
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     14-08-2019 02:41 PM


  • रामपुर पर आधारित भावनात्मक इतिहास लेखन
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     13-08-2019 12:44 PM


  • विभिन्न देशों में विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है, ईद-उल-जुहा / बकरीद
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     12-08-2019 03:46 PM


  • भारत की महत्वपूर्ण वैज्ञानिक हस्तियां
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     11-08-2019 12:14 PM


  • कुछ ऐसी सभ्यताएँ जो ख़त्म हो गयीं पारिस्थितिकी तंत्र के बदलाव से
    जलवायु व ऋतु

     10-08-2019 11:09 AM


  • हज यात्रा को पर्यावरण के अनुकूल बनाने हेतु एक कदम
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     09-08-2019 03:35 PM


  • बंगेश-बुंदेला युद्ध के कारण पड़ी रोहिलखंड राज्य की नींव
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     08-08-2019 03:50 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.