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इतिहास में रामपुर की धारणा को स्थानिक स्थान ने काफी प्रभावित किया

रामपुर

 28-02-2022 10:15 AM
वास्तुकला 1 वाह्य भवन

शहर से ताल्लुक रखने वाला हर कोई रामपुर (रामपुरियत) से संबंधित होने की भावना से परिचित है, जो इस स्थान के साथ स्वयं के भावनात्मक लगाव को व्यक्त करता है। भावनात्मक पहचान और स्थान के प्रति भावना भी स्थानिक प्रथाओं को प्रभावित करती है।एक स्थान को जिस तरह से निवासी अपनी पहचान से जोड़ते हैं, इसमें एक परिवर्तनात्मक संबंध हो सकता है,जिसका ऐतिहासिक रूप से यह समझने के लिए विश्लेषण किया जा सकता है कि स्थान और भावनाएं कैसे सामाजिक रूप से निर्मित होती हैं और कैसे ये अधिक अर्थ को अर्जित करती हैं।हमारी पुरानी यादें सार्वजनिक इतिहास और व्यक्तिगत भावनाओं के बीच संबंधों को समझने के लिए एक मूल्यवान संसाधन है। साथ ही ये हमें यह समझने की अनुमति देती हैं कि अतीत को एक भावात्मक अनुपातिक-अस्थायी ढांचे में कैसे याद किया जाता है। रामपुर के स्थानीयता और रामपुरी निवासियों के बीच के संबंध को रामपुरियों द्वारा लिखित स्थानीय इतिहास में देखा जा सकता है, जो रामपूरियों द्वारा लिखे गए इतिहास की पुरानी यादों का महत्वपूर्ण उदाहरण पेश करता है।
रामपुर आखिरी समृद्ध रोहिल्ला सामंत राज्यों में से एक था, जिसमें रोहिलखण्ड क्षेत्र में आँवला, नजीबाबाद और अन्य भी शामिल हैं।1774 के एंग्लो-रोहिल्ला (Anglo-Rohilla) युद्ध के बाद ब्रिटिश (British) ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) और अवध साम्राज्य की संयुक्त शक्ति ने रोहिल्ला को अपने कब्जे में ले लिया, लेकिन लालधांग की संधि (7 अक्टूबर 1774) ने रोहिल्ला नेता फैजुल्ला खान (1730-94) को रोहिलखंड में एक व्यक्तिगत संपत्ति रखने की अनुमति दी।मूल रूप से राजा राम सिंह के नाम पर, संपत्ति का नाम बदलकर मुताफाबाद कर दिया गया था, लेकिन इसका लोकप्रिय नाम रामपुर बना रहा।1857 के विद्रोह ने उत्तर भारत के राजनीतिक परिदृश्य को झकझोर कर रख दिया, जिसने मुगल और अवध राज्यों को एक ही झटके में तोड़ दिया, लेकिन रामपुर राज्य संयुक्त प्रांत में एकमात्र मुस्लिम शासित रियासत के रूप में बने रहने में कामयाब रहा, क्योंकि नवाब यूसुफ अली खान (1855-65) ने विजयी ब्रिटिश राज की वफादारी से सेवा की थी। रामपुर उर्दू के इतिहास से समृद्ध है, पार्थ चटर्जी अपने लेखन “हिस्ट्री इन दी वर्नैक्यलर (History in the vernacular)” में बताते हैं कि, स्थानिक जगह के इतिहास का एक महत्वपूर्ण गुण, स्थानीय या क्षेत्रीय ऐतिहासिक कल्पना की प्रमुखता को दर्शाता है जो "विशेष पक्ष के व्यावसायिक इतिहास के राष्ट्रीय ढांचे" को चुनौती देती है और "समुदाय की जीवित स्मृति" का जश्न मनाती है। यदि हम स्थानीय इतिहास पर चटर्जी के पक्ष से इतिहास लेखन की उर्दू परंपरा को देखें तो हमें मुगल और ब्रिटिश (British) दोनों साम्राज्यों के भारी तर्क पर पुनर्विचार करना होगा है, उदाहरण के लिए, डेनिएला ब्रेडी द्वारा उर्दू लेखन के विकास को उस समय ढूंढा गया जब इंडो- दक्षिण एशिया में फारसी और पश्चिमी इतिहास लेखन का उदय हो रहा था।अरबी (Arabic) और फारसी (Persian) इतिहास ने मुस्लिम इतिहास लेखन पर मौजूदा विद्वत्ता को परिभाषित किया है। भले ही दक्षिण एशिया में उनमें फिर से कार्य किया गया हो, लेकिन फिर भी वे ऐतिहासिक परंपरा को प्रदान करते हैं। फ़ारसी और मुग़ल साम्राज्यों का अध्ययन करने वाले विद्वानों ने तर्क दिया है कि फ़ारसी इतिहास मुख्य रूप से शासक और दरबार पर केंद्रित हैं, लेकिन इस अवधि के समाज और संस्कृति के अन्य पहलुओं में भी अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।
वहीं भारत-फ़ारसी इतिहासलेखन में, मुगल साम्राज्य के पतन के दौरान और बाद में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए, जिसने फ़ारसी महान गरीयवाद के साथ संवाद से उभरी एक गहन स्थानीय ऐतिहासिक बनावट हासिल की।परंतु मुगल साम्राज्य के पतन और ब्रिटिश उपनिवेशवाद के तहत फारसी भाषा के पतन पर ऐतिहासिक केंद्र बिन्दु ने उर्दू में इतिहास लेखन के उदय को छिपा दिया।अगर हम मुगल साम्राज्य और उसकी फारसी संस्कृति से ध्यान हटाते हैं, तो हमें उर्दू लेखनों का एक समृद्ध खजाना मिलता है, जो न केवल राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तनों के अनछुए ऐतिहासिक वृत्तांत को प्रदान करता है, बल्कि विभिन्न स्थानों में सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास की एक दिलचस्प पुनर्कल्पना भी करता है। इनमें न केवल हैदराबाद, भोपाल, टोंक और रामपुर जैसी रियासतों के स्थानीय लेखन शामिल हैं, बल्कि कस्बों (छोटे शहर)जैसे स्थानों को भी शामिल किया गया है। कस्बों में रोहिलखंड क्षेत्र के बिलग्राम, रादौली और अमरोहा शामिल हैं।ये लेखन स्थानीय इतिहास, पहचान और निवासियों की भावनाओं के साथ एक समान सरोकार को साझा करते हैं। स्थानिक इतिहास की शैली अरबी और फारसी इतिहासलेखन में लंबे समय से मौजूद है। फ्रांज रोसेन्थल मुस्लिम इतिहासलेखन में स्थानीय इतिहास की केंद्रीयता को "समूह चेतना की साहित्यिक अभिव्यक्ति" के रूप में उजागर करते हैं।साथ ही शैली में भूगोल और जीवनी और एक विशिष्ट स्थान के आर्थिक और सांस्कृतिक इतिहास का ज्ञान शामिल था।यह स्पष्ट रूप से इंडो-फ़ारसी कार्यों के मामले में है जिसमें ऐसे स्थानीय ऐतिहासिक वृत्तांत न केवल लेखन साहित्य में पाए जाते हैं बल्कि अन्य शैलियों में भी मौजूद होते हैं,जैसे जीवनी संग्रह और कविताएंजो शहर के पतन का विलाप करती हैं।साहित्यिक विधाओं और इतिहासलेखन के इस धुंधलेपन का एक अच्छा उदाहरण सैय्यद अहमद खान के असर अल-सनदीद ("The Remnant Signs of Ancient Heroes") के काम में देखा जा सकता है।इस प्रकार असर अल-सनदीद से हमें स्थान-विशिष्ट इतिहास की प्रकृति के बारे में दो महत्वपूर्ण संकेत प्राप्त होते हैं: पहला, शैलियों का धुंधलापन,और दूसरा, इस तरह के लेखन में विचारों की श्रेणियों के रूप में स्थान और भावनाओं की केंद्रीयता।इस प्रकार भावनाओं का यह इंडो-फ़ारसी ज्ञान जो स्थान और उसके निवासियों को नैतिक ज्ञान के स्रोतों के रूप में जोड़ता है, ने असर अल-सनदीद (1847) के पहले संस्करण को आकार दिया।उर्दू में स्थानीय इतिहास ने 1857 के बाद एक विशिष्ट गुणवत्ता और महत्वको प्राप्त किया, जो दिल्ली और लखनऊ जैसे शाही शहरों के पतन के लिए विलाप के साथ-साथ सांस्कृतिक संरक्षण के लिए नए आधार प्रदान करने के साथ सांस्कृतिक और साहित्यिक निवेश में वृद्धि को चिह्नित करती है, विशेष रूप से, उपनिवेशवाद के तहत उत्तर भारतीय मुसलमानों के लिए। वहीं रामपुर के स्थानीय (उर्दू) इतिहास का एक उल्लेखनीय उदाहरण अकबर उस-सनदीद ("द अकाउंट्स ऑफ हीरोज") है।मौलवी हकम नजम अल-गनी खान नजमी रामपुरी (नजमुल गनी) (1859-1932) एक महत्वपूर्ण इतिहासकार थे, जिन्होंने राजपूताना और अवध (तारिख-ए-अवध) के पांच-खंड इतिहास सहित कई स्थानीय इतिहास लिखे। साथ ही नजमुल गनी के आधिकारिक दो-खंड इतिहास अकबर अल-सनदीद को अक्सर "रोहिलखंड का इतिहास" के रूप में अनुवाद में संदर्भित किया जाता है।यह रामपुर के संदर्भ में क्षेत्रीय से स्थानीय इतिहास लेखन में परिवर्तन का प्रतीक है।
नजमुल गनी ने स्वयं इसे "रामपुर के इतिहास" के रूप में और "रोहिला पठानों के इतिहास" के रूप में "रोहिलखंड के इतिहास" के एक बड़े वृत्तान्त में प्रस्तुत किया।

संदर्भ :-
https://bit.ly/3LQgI0S

चित्र संदर्भ   
1. रज़ा पुस्तकालय का एक चित्रण (prarang)
2. रामपुर के नवाबों का एक चित्रण (facebook)
3. अकबर के चित्र को दर्शाता चित्रण (wikimedia)
4. असर अल-सनदीद को दर्शाता एक चित्रण (Ideakart)



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