Post Viewership from Post Date to 20-Sep-2021 (30th Day)
City Subscribers (FB+App) Website (Direct+Google) Email Instagram Total
2526 191 2717

***Scroll down to the bottom of the page for above post viewership metric definitions

कला बाजार में धूम मचा रहे मिट्टी के बर्तन उद्योग महामारी के कारण काफी प्रभावित हुए हैं

रामपुर

 20-08-2021 02:18 PM
म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

भारत में मिट्टी के बर्तन बनाने की कला अभी भी एक अत्यधिक कम लाभ अर्जित करने वाली कला है। कम मूल्यवान मिट्टी के बर्तनों की कला सदियों से सुंदर सिरेमिक (Ceramic) कला में विकसित हुए हैं। कला उद्यमी आज न केवल अपने रचनात्मक पक्ष की तलाश कर रहे हैं, बल्कि स्टूडियो कुम्हार (Studio Potters) के रूप में अपने करियर (Career) का निर्माण भी कर रहे हैं। मिट्टी के बर्तन सबसे पुराने ज्ञात कला रूपों में से एक है, और बहुत अधिक जीवित और विकसित हैं। मिट्टी के बर्तनों की कला मिट्टी की शक्ति और नाजुकता, स्वतंत्रता और नियंत्रण की द्वंद्वात्मकता, विज्ञान और कला के संगम को प्रदर्शित करती है। भारत में मिट्टी के बर्तनों को बनाने की कला की शुरुआत मध्य पाषाण काल से शुरू हुई तथा धीरे-धीरे इन्हें बनाने की तकनीकों में भी कई परिवर्तन आए।
वर्तमान समय में लोग मिट्टी और चीनी मिट्टी के बर्तनों में अत्यधिक निवेश कर रहे हैं।यदि बर्तनों की कला में कोई व्यक्ति रुचि रखता है, तो आज भी मिट्टी के बर्तन एक अच्छी शुरुआत है। मिट्टी के पात्र वर्तमान समय में कला बाजार में धूम मचा रहे हैं, जबकि चीनी या सिरेमिक फूलदान हमेशा से कीमती रहे हैं। मिट्टी के पात्र में नए और रोमांचक काम ने लोगों को अपनी तरफ आकर्षित किया है, जिससे कि लोग इन्हें एकत्रित करने के लिए उत्साहित हैं। इसी प्रकार से सिरेमिक कला को घर की सजावट के लिए बहुत अधिक पसंद किया जाता है। सिरेमिक की तकनीक नई तापन तकनीकों, मिश्रण विधियों और नियंत्रणीय भट्टियों के साथ विकसित हो रही है।
मिट्टी के बर्तन सबसे पुराने ज्ञात कला रूपों में से एक है, और यह बहुत अधिक कारगर और विकसित हो रहे हैं।भारत में आज कई युवा मिट्टी और सिरेमिक कला की ओर अत्यधिक आकर्षित हो रहे हैं, क्योंकि भारत में पारंपरिक गाँव के कुम्हारों की यादों से कुछ कलाकार बचपन के दिनों से ही मिट्टी और सिरेमिक कला से प्रभावित थे, जबकि अन्य लोगों को अपनी पढ़ाई के दौरान इस कला में रूचि उत्पन्न हुई। दिलचस्प बात यह है कि प्रदर्शन करने वाले कई कलाकार बिल्कुल अलग पृष्ठभूमि से हैं, लेकिन अब वे सिरेमिक कला में पूरी तरह से व्यस्त हो गए हैं। मिट्टी की कला प्रतिमान प्रयोग के साथ ही साथ शौक का एक विषय बन चुका है। आज यह एक व्यवसाय के रूप में जन्म ले रहा है, जो एक बहुत ही बड़े स्तर पर लोगों और कलाकारों को रोजगार प्रदान कर रहा है। मिट्टी के बर्तन बनाने की कला अब कुम्हारों तक ही सीमित नहीं रही है बल्कि यह बड़े-बड़े कलाकेंद्रों तक पहुँच बना चुकी है। स्टूडियो कुम्हार एक ऐसा संस्थान है, जहाँ पर शौकिया कलाकारों या कारीगरों द्वारा छोटे समूहों में या स्वयं मिट्टी के बर्तन आदि बनाए जाते हैं। इस प्रकार के संस्थानों में मुख्य रूप से खाने और खाना बनाने आदि के ही मिट्टी के बर्तन बनाये जाते हैं।इनके अलावा संस्थान मिट्टी से निर्मित सजावटी वस्तुओं के निर्माण के लिए भी प्रसिद्ध हैं। स्टूडियो मिट्टी के बर्तनों में टेबलवेयर (Tableware) और कुकवेयर (Cookware) जैसे कार्यात्मक सामग्री और मूर्तिकला जैसे गैर-कार्यात्मक सामग्री शामिल हैं, जिसमें फूलदान और कटोरे मध्य मैदान को आवृत करते हैं, इन्हेंअक्सर केवल प्रदर्शन के लिए उपयोग किया जाता है।
यह प्रचलन सन् 1980 के बाद से एक बड़े पैमाने पर प्रसारित होना शुरू हुआ और आज एक बहुत बड़े स्तर पर यह विभिन्न देशों में विद्यमान है। मिट्टी के बर्तनों की लोकप्रियता कुछ इस प्रकार है कि विभिन्न वीथिका में विभिन्न प्रकार की मिट्टी से बनाए गये विभिन्न कला नमूनों की प्रदर्शिनी आयोजित की जाती है।प्रदर्शिनी में विभिन्न कलाकारों द्वारा बनाए गए मिट्टी की कला के प्रतिमानों को जगह प्रदान की जाती है। जैसे विभिन्न धातुओं के दाम आसमान छू रहे हैं ऐसे में मिट्टी के बर्तन रोजगार को एक नया आयाम प्रदान करते हैं। इसके अलावा लोगों का मिट्टी की कला के प्रति आकर्षण इस क्षेत्र को और भी विकसित करने का कार्य करता है।कुछ कलाकार बचपन के दिनों से ही भारत में पारंपरिक गाँव के कुम्हारों की यादों से प्रभावित होकर इस कला में रुचि रखते हैं, जबकिदूसरों ने पढ़ाई और विदेशों में प्रविष्टि के दौरान कला को अपनाया। भारत में कार्य कर रहे कुम्हारों के लिए यह एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण समय है, जब वे अपनी मिट्टी की कलाओं और बर्तनों को एक बड़े स्तर पर ले जाने का कार्य कर सकते हैं।
वहीं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर खुर्जा में कई सुंदर चीनी के बर्तन और कुछ सजावटी वस्तुएं बनाई जाती है। लेकिन कोरोनावायरस (Coronavirus) महामारी के चलते खुर्जा के कारीगर खुर्जा में सिरेमिक कारीगर मांग, राजस्व में गिरावट को दूर करने के लिए सरकारी समर्थन की मांग कर रहे हैं। खुर्जा में कारीगर अपने भविष्य के बारे में चिंतित हैं, क्योंकि इस उद्योग से कई लोगों का पेट भरा जाता है।यह एक श्रम प्रधान उद्योग है और कई कुशल मजदूर पश्चिम बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश से आते हैं।खुर्जा को महामारी के दौरान हॉटस्पॉट (Hotspot) घोषित किए जाने के साथ, ऐसा माना जा रहा है कि उनमें से ज्यादातरकुशल मजदूर जल्द ही वापस नहीं आने वाले हैं।खुर्जा में 250 सिरेमिक उद्योग हैं लेकिन करीब 450 इकाइयां चालू हैं। हाई-एंड ब्लू (High end blue)मिट्टी के बर्तनों और बोन चाइना (Bone china) से लेकर उपयोगितावादी ऊष्मारोधी तक, वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कम से कम 50,000 लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं।यह शहर सालाना लगभग 100 करोड़ रुपये का कारोबार करता है। महामारी के कारण, विनिर्माण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और उत्पादन घटकर 50% हो गया है।केवल इतना ही नहीं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण कम करने की दिशा में सरकार की सक्रिय नीति का खामियाजा कुम्हारों को भुगतना पड़ रहा है। कोयले से चलने वाली ईंटों की चिमनियां, जो कभी शहर के क्षितिज पर बिंदीदार थीं, अब परित्यक्त स्मारकों को न पहुंचाने की वजह से प्रतिबंधित कर दी गई हैं।

संदर्भ :-
https://bit.ly/2XEdeKq
https://bit.ly/3AVLv66
https://bit.ly/2T2hf65
https://bit.ly/3sw7Lkj
https://bit.ly/3sxd3M5

चित्र संदर्भ
1. मिट्टी के बर्तनों के विक्रेता का एक चित्रण (flickr)
2. मिट्टी के बर्तनों का निर्माण करते कुम्हार का एक चित्रण (unsplash)
3. सुंदर मिट्टी के बर्तनो का एक चित्रण (flickr)



***Definitions of the post viewership metrics on top of the page:
A. City Subscribers (FB + App) -This is the Total city-based unique subscribers from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App who reached this specific post. Do note that any Prarang subscribers who visited this post from outside (Pin-Code range) the city OR did not login to their Facebook account during this time, are NOT included in this total.
B. Website (Google + Direct) -This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.
C. Total Viewership —This is the Sum of all Subscribers(FB+App), Website(Google+Direct), Email and Instagram who reached this Prarang post/page.
D. The Reach (Viewership) on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion ( Day 31 or 32) of One Month from the day of posting. The numbers displayed are indicative of the cumulative count of each metric at the end of 5 DAYS or a FULL MONTH, from the day of Posting to respective hyper-local Prarang subscribers, in the city.

RECENT POST

  • काफी हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है संपूर्ण विश्व में बुद्ध पूर्णिमा
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-05-2022 09:46 AM


  • तीव्रता से विलुप्‍त होती भारतीय स्‍थानीय भाषाएं व् उस क्षेत्र से संबंधित ज्ञान का भण्‍डार
    ध्वनि 2- भाषायें

     17-05-2022 02:11 AM


  • जलीय पारितंत्र को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, शार्क
    व्यवहारिक

     15-05-2022 03:26 PM


  • क्या भविष्य की पीढ़ी के लिए एक लुप्त प्रजाति बनकर रह जाएंगे टिमटिमाते जुगनू?
    तितलियाँ व कीड़े

     14-05-2022 10:07 AM


  • गर्मियों में रामपुर की कोसी नदी में तैरने से पूर्व बरती जानी चाहिए, सावधानियां
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     13-05-2022 09:35 AM


  • भारत में ऊर्जा खपत पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए नीति और संरचना में बदलाव
    जलवायु व ऋतु

     11-05-2022 09:05 PM


  • रामपुर के निकट कासगंज से जुड़ा द सेकेंड लांसर्स रेजिमेंट के गठनकर्ता विलियम गार्डन का इतिहास
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     11-05-2022 12:08 PM


  • कोविड 19 के उपचार हेतु लगाए जाने वाले एमआरएनए टीकों से उत्‍पन्‍न समस्‍या
    कीटाणु,एक कोशीय जीव,क्रोमिस्टा, व शैवाल

     10-05-2022 08:57 AM


  • भारत में दुनिया में सबसे अधिक एम.बी.ए डिग्री प्राप्तकर्ता हैं, लेकिन फिर भी कई हैं बेरोजगार
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     09-05-2022 08:51 AM


  • निवख समूह के लिए उनके पूर्वज और देवताओं दोनों को अभिव्यक्त करते हैं, भालू
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     08-05-2022 07:31 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id