भारत में क्यों उपनगरीकरण तेजी से हो रहा है ?

रामपुर

 18-07-2021 06:07 PM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

2011 की जनसंख्या जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दशक में शहरी भारत की जनसंख्या में 9करोड़ की वृद्धि हुई। इस अवधि के दौरान, 2774 नए शहर भी अस्तित्व में आए। इन नए शहरों में से अनुमानित एक तिहाई शहर भारत के बड़े शहरों के निकट या उसकी परिधि पर स्थित हैं।बड़े शहरों के निकट या उसकी परिधि पर स्थित शहरों या नगरों को उपनगर कहा जाता है।जब मुख्य शहरी क्षेत्रों की आबादी उन शहरों के निकट या उसकी परिधि में स्थित क्षेत्रों या उपनगरों में तेजी से पलायन करने लगती है, तब इस घटना को उपनगरीकरण कहा जाता है। उपनगर भारत के केवल 1% भूमि क्षेत्र को आवरित करते हैं, तथा देश के रोजगार में लगभग 18% की भागीदारी देते हैं
उपनगरीकरण की प्रक्रिया अक्सर आर्थिक रूप से विकसित देशों में होती है, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका (America) में, जहां की अधिकांश आबादी मुख्य शहरों या ग्रामीण क्षेत्रों में रहने के बजाय उपनगरों में निवास करती है।
पिछले दशक से भारत में भी उपनगरीकरण तेजी से हो रहा है, जिसका प्रमुख कारण महानगरीय ठहराव को माना जाता है। उदाहरण के लिए 1998-2005 के बीच महानगरों में रोजगार में गिरावट देखी गई, जबकि इनकी परिधि पर स्थित कस्बों और गांवों में उच्च-प्रौद्योगिकी निर्माण, रियल एस्टेट और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों में तीव्र वृद्धि देखी गई है। भूमि मूल्यांकन और लेनदेन के लिए कमजोर संस्थागत नींव तथा भूमि उपयोग पर सख्त विनियमन ने उपनगरीकरण को प्रोत्साहित किया है। चूंकि उपनगरीय क्षेत्र शहर की तुलना में उच्च आर्थिक विकास और रोजगार पैदा कर रहे हैं,इसलिए भारत में उपनगरीकरण अपेक्षा से कहीं अधिक तेज़ी से हो रहा है।
उपनगरों में जनसंख्या घनत्व और अपराध मुख्य शहरों की अपेक्षा कम है, तथा अधिक स्थिर आबादी के कारण इन्हें रहने और परिवार बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और सस्ती जगह के रूप में देखा जा रहा है। भूमि की बढ़ती कीमतों और कार्यालयों के बढ़ते किराए ने कंपनियों को उपनगरीय क्षेत्रों में विस्थापित करने को प्रोत्साहित किया है। बढ़ी हुई आय के साथ, लोग मुख्य शहरी क्षेत्र में पहुंचने हेतु यात्रा के लिए अधिक भुगतान करने में सक्षम है, जिससे वे उपनगरों में बस रहे हैं। भारतीय शहर अपने शहरों पर अत्यधिक कठोर भूमि उपयोग नियम, किराया नियंत्रण प्रणाली और भवन ऊंचाई प्रतिबंध लगाते हैं,जिससे निजात पाने के लिए उपनगरों का सहारा लिया जा रहा है। उपनगरीय नगर पालिकाएं औद्योगिक भूमि उपयोगकर्ताओं को अपने क्षेत्र में आकर्षित करने के लिए टैक्स ब्रेक और नियामक प्रोत्साहन प्रदान करती हैं तथा मजबूत और परिष्कृत बुनियादी ढांचे का विकास केवल शहर की परिधि में ही संभव है,जहां भूमि पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और अधिग्रहण की लागत कम है। इन सभी कारकों की वजह से उपनगरीकरण में तेजी से वृद्धि हो रही है। उपनगरीकरण से शहर के भीतरी इलाकों में गिरावट आ सकती है क्योंकि कुशल लोग और व्यवसाय मुख्य शहरों से दूर होते जा रहे हैं, जिसका मतलब है कि मुख्य शहरों में रोजगार के अवसरों में कमी होती जा रही है।
वर्तमान समय में पूरे विश्व में कोरोना महामारी फैली हुई है, तथा ऐसे समय में उपनगरीकरण की घटना में और भी वृद्धि देखने को मिली है। महामारी के कारण हुई तालाबंदी की वजह से जहां लोगों को घर बैठकर अपने ऑफिस का कार्य करना पड़ रहा है, वहीं अनेकों लोगों ने अपनी आजीविका भी खो दी है। ऐसी स्थिति में लोग ऐसे क्षेत्रों की तलाश कर रहे हैं, जहां वे कम पैसे खर्च कर आसानी से जीवन बिता सकते हैं तथा महामारी से सुरक्षित रह सकते हैं।
महामारी के मद्देनजर हर कोई उन समस्याओं का सामना कर रहा है,जो तीव्र शहरीकरण के कारण उत्पन्न हुई हैं।भलेही उपनगरों ने लोगों को कुछ हद तक राहत देने का कार्य किया है, लेकिन यह मानना गलत है कि उपनगरीकरण महामारी से निजात पाने का एक प्रभावी उपाय है। उपनगरों के साथ ऐसी अनेकों समस्याएँ जुड़ी हुई हैं, जो महामारी के प्रसार को और भी बढ़ा सकती हैं। जैसे:
1. यहाँ रहने वाले अधिकांश लोगों की स्वच्छ पानी तक पहुंच नहीं है
2. अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं मौजूद नहीं हैं, जो महामारी के समय में अत्यधिक आवश्यक है।
3. उपनगर अलग-थलग होते हैं, ये मौलिक रूप से ऐसे अस्थिर स्थान हैं, जहां सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट अत्यधिक है।अकेलापन और तनाव कोविड -19 से लड़ने की शरीर की क्षमता को कम कर सकता है, क्योंकि ये भावनाएं अन्य वायरल बीमारियों की वृद्धि का कारण बनती हैं।
4. उपनगर शहरों से जुड़े होते हैं, इसलिए वे भी बीमारी के फैलने का कारण बनते हैं।
5. उपनगरों में स्वच्छता और बिजली तक पहुंच तथा इनकी गुणवत्ता मुख्य शहरकी तुलना में बहुत खराब है।
6. यहां गुणवत्तापूर्ण और सस्ती शिक्षा सेवाओं तक पहुंच का भी अभाव है।
7. कृषि भूमि के व्यावसायीकरण और वन क्षेत्रों पर अतिक्रमण से जहां क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा है, वहीं अनियोजित शहरीकरण और प्राकृतिक जल भंडारण और जल निकासी प्रणालियों के अनियंत्रित अतिक्रमण ने अनेकों आपदाओं को जन्म दिया है।

संदर्भ:
https://cushwk.co/3hIZzJF
https://bit.ly/3hFSU2S
https://bit.ly/2UR6QxO
https://bit.ly/3rftlJd
https://bit.ly/2TfJ5PL
https://bit.ly/3ij5QdY
https://bit.ly/3il3N9p

चित्र संदर्भ
1. पिटेस्टी, रोमानिया(Pitesti, Romania) में साम्यवादी उपनगरीकरण के बाद का एक चित्रण (wikimedia)
2. अमेरिका में एक उपनगरीय भूमि उपयोग पैटर्न का एक चित्रण (flickr)
3. डॉक्टर ने COVID-19 के लिए घर से काम का संदेश चिन्ह धारण किया एक चित्रण (flickr)



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