रोहेला कौन थे ?

रामपुर

 09-11-2017 06:42 PM
मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक
18वीं शताब्दी के आरंभ में उत्तरी भारत में आने वाली कौम को इतिहास में रोहेला के नाम से जाना जाता है। यह लोग पेशावर फौजी थे। भारत आकर फौजी नौकरी करना – उनके जीविका का मुख्य साधन था। मुग़ल शासक औरंगज़ेब के निधन (1707) के बाद मुग़ल साम्राज्य का पतन बड़ी तेज़ी से आरंभ हुआ। केंद्र की कमज़ोरी का लाभ उठाकर मुग़ल सूबेदारों ने स्वतन्त्र सूबों की स्थापना करना आरंभ कर दिया। वे नाममात्र को ही मुग़ल साम्राज्य से रिश्ता बनाये रहें| इस राजनैतिक पतन का अंत 1857 की क्रांति में हुआ जब अंग्रेजों ने भारत के अधिकतर भाग पर अधिकार स्थापित कर लिया। अराजकता के इस युग में रोहेलों को कठेर में फलने फूलने और रोहेला साम्राज्य स्थापित करने का सुअवसर मिला। सरदार दाऊद खां रोहेला और उसके पुत्र नवाब अली मुहम्मद खां ने कठेर पर और गंगा के दोआबी इलाके – नजीबाबाद में नवाब नजीब-उद-दौला ने शक्तिशाली रोहेला राज्य स्थापित किया। रोहेलाओं नें आँवला, बरेली, पीलीभीत, मोरादाबाद, शाहजहाँपुर और बिसौली को सांस्कृतिक केंद्रों के रूप में बनाया। रोहेलाओं के इसी काल में बड़े पैमाने पर भवनों, मस्जिदों का निर्माण हुआ। भवनों आदि के उदाहरण उपरोक्त स्थानों पर देखने को मिल जाते हैं। यहाँ के भवनों में यहाँ की ऐतिहासिकता दिखाई देती है। यदि रोहेलाओं के उदय व मुग़लों के पतन के समय काल की बात करें तो यह दिखाई देता है कि- मुग़ल साम्राज्य के पतन का मुख्य कारण सरकारी आमदनी में कमी थी। मुग़ल हुकूमत उस वक्त तक मज़बूत रही जब तक मालगुज़ारी की आमदनी केन्द्रीय कोष में जमा होती रही। ख़ालसा ज़मीनों की आमदनी फौजी तनख्वाह और शाही खानदान की आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए पर्याप्त रही। जब राजस्व विभाग में चोरियाँ आरंभ हो गयी तो सरकारी आमदनी कम हो गयी। सूबेदार आमदनी बढ़ाने के लिए दूसरे इलाकों पर अधिकार करने लगे। सूबेदारों ने लगान वसूल करने के लिए जाती फ़ौज रखना शुरू कर दिया। बादशाहों की गलत योजनाओं के कारण ज़मींदार और अमीर वर्ग भी परेशान रहने लगा। लगान वसूल करने के लिए जब फ़ौज आती तो काश्तकार गाँव छोड़कर जंगल में भाग जाते। उपरोक्त सभी बातें मुग़ल राज के पतन का कारण बनीं और मुग़लों के पतन के कारण ही रोहेला साम्राज्य की स्थापना हुई। रोहेलाओं के आधार इस क्षेत्र का नाम रोहेलखंड पड़ा। 1. रोहेला इतिहास (इतिहास व संस्कृति) 1707-1774, डब्ल्यू. एच. सिद्दीकी।

RECENT POST

  • प्रति घंटे 72 किलोमीटर तक दौड़ सकते हैं, भूरे खरगोश
    व्यवहारिक

     22-05-2022 03:30 PM


  • अध्यात्म और गणित एक ही सिक्के के दो पहलू हैं
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     21-05-2022 11:15 AM


  • भारत में प्रचिलित ऐतिहासिक व् स्वदेशी जैविक खेती प्रणालियों के प्रकार
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     20-05-2022 09:59 AM


  • भारत के कई राज्यों में बस अब रह गई ऊर्जा की मामूली कमी, अक्षय ऊर्जा की बढ़ती उपलब्धता से
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     19-05-2022 09:42 AM


  • मिट्टी के बर्तनों से मिलती है, प्राचीन खाद्य पदार्थों की झलक
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     18-05-2022 08:44 AM


  • काफी हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है संपूर्ण विश्व में बुद्ध पूर्णिमा
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-05-2022 09:46 AM


  • तीव्रता से विलुप्‍त होती भारतीय स्‍थानीय भाषाएं व् उस क्षेत्र से संबंधित ज्ञान का भण्‍डार
    ध्वनि 2- भाषायें

     17-05-2022 02:11 AM


  • जलीय पारितंत्र को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, शार्क
    व्यवहारिक

     15-05-2022 03:26 PM


  • क्या भविष्य की पीढ़ी के लिए एक लुप्त प्रजाति बनकर रह जाएंगे टिमटिमाते जुगनू?
    तितलियाँ व कीड़े

     14-05-2022 10:07 AM


  • गर्मियों में रामपुर की कोसी नदी में तैरने से पूर्व बरती जानी चाहिए, सावधानियां
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     13-05-2022 09:35 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id