शुद्ध अमूर्त रूपों पर एकाग्रता द्वारा पहचानी जाती है इस्लामी वास्तुकला

रामपुर

 05-08-2020 09:30 AM
वास्तुकला 1 वाह्य भवन

मुस्लिम वास्तुकला को अपने आकर्षक प्रभाव के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। रूप और सामग्री के साथ-साथ विषय और अर्थ में मुस्लिम कला अन्य संस्कृतियों की कला से बिल्कुल अलग है। सामान्य रूप में पूर्वी कला मुख्यतः रंग से संबंधित है, जबकि पश्चिमी कला रूप में रुचि रखती है। स्त्री रूप में पूर्वी कला, भावना और रंग को संदर्भित करती है, जबकि पुरूषत्व रूप में पश्चिमी कला बौद्धिक है और रंग की उपेक्षा करते हुए प्लास्टिक रूप पर आधारित है। मुस्लिम कला में कभी भी बौद्धिकता की कमी नहीं थी, यहां तक कि अपने सरलतम रूपों में भी नहीं। अवलोकन करने और सीखने का निमंत्रण सभी रूपों में छिपे या प्रदर्शित हुए संदेशों में पाया जाता है, चाहे वह रूप इसके ज्यामितीय पैटर्न (Pattern) का हो या हस्तलिपि और पुष्प कला का। प्राकृतिक वस्तुओं के प्रतिनिधित्व के विपरीत मुस्लिम कला अपनी शुद्ध अमूर्त रूपों पर एकाग्रता द्वारा पहचानी जाती है। ये रूप विभिन्न आकार और पैटर्न के होते हैं। प्रिस्से (1878) ने इस्लामी कला को तीन प्रकार में वर्गीकृत किया है: पुष्प, ज्यामितीय पैटर्न और हस्तलिपि या सुलेख। एक अन्य वर्गीकरण के अनुसार इन्हें स्टैलेक्टाइट्स (Stalactites) ज्यामितीय अरबस्क (Arabesque) और अन्य रूपों में वर्गीकृत किया गया है। एक निर्णायक कारक जिसने मुस्लिम कला की प्रकृति को निर्धारित किया है, वह इसका धार्मिक नियम है, जो कला में मानव या जानवरों के जीवित रूपों के उपयोग की मनाही करता है। मुस्लिम कला का विषय काफी विस्तृत है। पुष्प कला को मुस्लिम कला का पहला तत्व माना जाता है।

जीवित प्राणियों की नकल के लिए इस्लाम में निषेध के साथ मुस्लिम कला में पौधे का उपयोग कुछ हद तक अनुकूलित है। मुस्लिम कला के दूसरे तत्व में ज्यामितीय पैटर्न शामिल हैं। इसका मुख्य कारण अमूर्त रूपों की लोकप्रियता है, जिन्होंने जीवित प्राणियों के निषिद्ध रूपों के उपयोग के लिए विकल्प प्रदान किया। ज्यामितीय पैटर्न विशेष रूप से मस्जिदों में दिखायी देते हैं, क्योंकि अमूर्त ज्यामितीय रूप आत्म चिंतन को प्रेरित करते हैं। इस प्रकार की कला के विस्तार के पीछे दूसरा कारक उस समय मुस्लिम दुनिया में ज्यामिति के विज्ञान के विकास और लोकप्रियता से जुड़ा था। ज्यामितीय पैटर्न अरबस्क की प्रसिद्ध अवधारणा से बहुत अधिक जुडा हुआ है, जिसे सपाट सतहों के लिए अलंकृत कला (Ornament) के रूप में परिभाषित किया जाता है, जिसमें बहुभुज, वृत्त और एक दूसरे से जुडी हुई रेखाओं और वक्रों के ज्यामितीय पैटर्न होते हैं। इसमें सतह की सजावट शामिल होती है। यह सजावट कुण्डलित और एक दूसरे से जुडे हुए पर्ण समूहों, तंतुओं और रेखाओं के लयबद्ध रैखिक पैटर्न पर आधारित होती है। इसकी एक अन्य परिभाषा इस्लामिक दुनिया में इस्तेमाल होने वाला पत्ती अलंकरण (Foliate Ornament) है, जिसमें आमतौर पर पत्तियों का उपयोग किया जाता है और उन्हें सर्पिलाकार तनों से जोड़ा जाता है। इसमें आमतौर पर एक एकल डिज़ाइन (Design) होता है, जिसे या तो एक बार या फिर कई बार दोहराया जा सकता है। शब्द 'अरबस्क' का उपयोग कला इतिहासकारों द्वारा एक तकनीक शब्द के रूप में किया जाता है। अरबस्क इस्लामी कला का एक मूल तत्व है, लेकिन वे इस्लाम के आने से पहले ही विकसित हो चुका था।

कुछ पश्चिमी अरबस्क इस्लामी कला से उत्पन्न हुए हैं किंतु अन्य प्राचीन रोमन सजावट पर आधारित हैं। पश्चिम में वे अनिवार्य रूप से सजावटी कलाओं में पाए जाते हैं, लेकिन आम तौर पर इस्लामी कला की गैर-आलंकारिक प्रकृति के कारण, अरबस्क सजावट अक्सर सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में एक प्रमुख तत्व है और वास्तुकला की सजावट में एक बड़ी भूमिका निभाता है। मुसलमानों द्वारा विकसित तीसरी सजावटी कला सुलेख है, जिसमें कौशलपूर्ण अभिलेखों का उपयोग होता है, जिसे कभी-कभी ज्यामितीय और प्राकृतिक रूपों के साथ जोड़ा जाता है। मुस्लिम कला के अन्य रूपों की तरह, पश्चिमी विद्वानों ने इसके अन्य अक्षर कलाओं से संबंधित होने का दावा किया लेकिन मुस्लिम सुलेख और प्राचीन चित्रलिपि के बीच किसी भी संबंध के सुझाव को अभी स्वीकारा नहीं जा सकता। मिस्र के लोग भले ही व्यापक रूप से दीवार चित्रों पर इनका उपयोग करते थे, लेकिन इसका कोई सजावटी उद्देश्य नहीं था। सजावटी कला के रूप में सुलेख का विकास कई कारकों के कारण था। पहला कारण ये कि मुसलमान पवित्र पुस्तक (कुरान) से जुड़े हैं, जो मस्जिदों में इसके छंदों के उपयोग में परिलक्षित होता था। उद्देश्य केवल सजावटी नहीं था, बल्कि धार्मिक भावना का भी था। अरबी सुलेख की उपस्थिति के पीछे दूसरा कारक इस्लाम में अरबी के महत्व से जुड़ा हुआ है क्योंकि प्रार्थना में अरबी का उपयोग अनिवार्य है।

मस्जिदों में इस्लामी कला रूपों को देखना आम बात है। रामपुर की विभिन्न मस्जिदों में इस्लामी अलंकरण कला के साक्ष्य आसानी से देखे जा सकते हैं। इस्लामी मध्ययुगीन कला और वास्तुकला का महत्व न केवल इस तथ्य में है कि यह वो समय था जब पारंपरिक इस्लाम के कई संजातीय, साहित्यिक, धार्मिक, सामाजिक और कलात्मक विशेषताओं का निर्माण हुआ लेकिन यह पहचानने में भी महत्वपूर्ण है कि यह अवधि रोम वास्तुकला और गौथिक (Gothic) यूरोप के साथ समकालीन है। मस्जिद में अलंकरण एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में भिन्न हो सकता है। उदाहरण के लिए मलेशिया के लोगों का अपनी मस्जिद को अलंकृत करने का तरीका अरबी लोगों से अलग है, लेकिन यह विभिन्नता बहुत ज्यादा नहीं है क्योंकि वे सभी एक धर्म और समुदाय से आते हैं, जो इस्लाम है। यही इस्लामी कला का मुख्य प्रतीकात्मक अर्थ है जो विविधता में एकता की व्याख्या करता है। मस्जिद एक सुंदर धर्म के अस्तित्व का प्रतीक है। 11वीं शताब्दी तक, अधिकांश सजावटी तकनीक जैसे कि मुस्लिम पूर्व में सजावटी ईंट का कार्य या ढले हुए प्लास्टर (Stucco) का उपयोग तथा केंद्रीय मुस्लिम दुनिया में मोज़ाइक (Mosaics) और नक्काशीदार पत्थरों का उपयोग पूर्व इस्लामी संस्कृतियों और समाजों से विरासत में मिला था। यह केवल 11वीं से 13वीं शताब्दी में था कि ज्यामितीय, सुलेख और अमूर्त वनस्पति रूपांकनों के दोहराव वाले पैटर्न और जटिल डिजाइन का उपयोग प्रमुख सजावटी प्रदर्शनों का हिस्सा बन गया।

मोनोक्रोम और पॉलीक्रोम ज्यामितीय इंटरलेस (Monochrome and Polychrome Geometric Interlace), स्टोन क्लैडिंग और इनले (Stone Cladding and Inlay), चमकती हुयी ईंटें (Glazed Bricks), पत्थर मूर्तिकला, ग्लेज्ड टाईल्स (Glazed Tiles), नीली और सफेद अंडरग्लेज पेंटेड टाइल्स (Underglaze Painted Tiles) आदि अनेक विशेषताएं इस्लामी वास्तुकला में देखने को मिलती हैं। इस्लामी संस्कृति में, पैटर्न को आध्यात्मिक क्षेत्र, मन और आत्मा को शुद्ध करने का साधन माना जाता है। इस्लाम की अधिकांश कला, एक सजावट कला है, जिसे परिवर्तन की कला भी कहा जा सकता है। यह वास्तुकला, चीनी मिट्टी की कला, कपड़ा या किताबों की कला आदि सभी मुस्लिम कलाओं में परिलक्षित होती है। इसका उद्देश्य मस्जिदों को प्रकाशमान या चमकीले और पैटर्न रूप में परिवर्तित करना है। इसके अलावा कुरान के सजाए गए पृष्ठ अनंत में झांकने के लिए सहायक बन सकते हैं।

संदर्भ:
https://muslimheritage.com/introduction-to-muslim-art-and-ornaments/
https://en.wikipedia.org/wiki/Arabesque
https://bit.ly/2rUydsX
https://link.springer.com/referenceworkentry/10.1007%2F978-1-4020-4425-0_8634
https://en.wikipedia.org/wiki/Islamic_architecture#Ornaments
https://en.wikipedia.org/wiki/Islamic_geometric_patterns#Purpose

चित्र संदर्भ:

मुख्य चित्र में इस्लामिक वास्तुकला में प्रयुक्त ज्यामितीय आलेखों को दिखाया गया है। (Pikist)
दूसरे चित्र में इस्लामिक वास्तु के अंतर्गत प्रयुक्त पुष्प कला को दिखाया गया है। (Picseql)
तीसरे चित्र में इस्लामिक वास्तु का सर्वोत्तम उदाहरण ताजमहल दिखाया गया है। (Prarang)
चौथे चित्र में ज्यमितियिक तत्वों और पुष्प कला अल्पनाओं से युक्त अबू धाबी स्थित इस्लामिक वास्तु को दिखाया गया है। (Flickr)
अंतिम चित्र में अबू धाबी में स्थित इस्लामिक वास्तु का सुन्दर चित्र है। (Picseql)



RECENT POST

  • विश्व युद्धों के हैं भारत पर सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     30-09-2020 03:51 AM


  • भारत में क्रिकेट की तुलना में इतना लोकप्रिया नहीं है फुटबॉल
    हथियार व खिलौने

     29-09-2020 03:18 AM


  • पारंपरिक और नाभिकीय हथियारों का फर्क
    हथियार व खिलौने

     28-09-2020 09:58 AM


  • फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     27-09-2020 06:51 AM


  • स्वर्ण अनुपात- संख्याओं और आकृतियों का सुन्दर समन्वय
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     26-09-2020 04:34 AM


  • वाइन और धर्म के बीच संबंध
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     25-09-2020 03:23 AM


  • बरेच जनजाति और रोहिल्ला कनेक्शन
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     24-09-2020 04:00 AM


  • भारत में तुर्कों का मुगलों से लेकर वर्तमान की राजनीति पर एक उल्लेखनीय प्रभाव
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     23-09-2020 03:25 AM


  • ‘इंडो-सरसेनिक (Indo-Saracenic)’ वस्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, रामपुर स्थित रंग महल
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     22-09-2020 11:27 AM


  • सबसे पुराने ज्ञात कला रूपों में से एक हैं मिट्टी के बर्तन
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     21-09-2020 04:05 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id