शरीर की मौसम संबंधी जरूरतों को पूरा करते हैं, मौसमी फल और सब्जियां

रामपुर

 26-05-2020 09:45 AM
स्वाद- खाद्य का इतिहास

धरती पर मनुष्य को प्रकृति या ऋतुएं एक वरदान के रूप में प्राप्त हुई हैं। जहां पूरे साल भर में हम एक से अधिक ऋतुओं का अनुभव कर सकते हैं, वहीं इन ऋतुओं में होने वाले विशिष्ट भोज्य पदार्थों का भी सेवन कर सकते हैं। विभिन्न ऋतुओं में होने वाले भोज्य पदार्थों को मौसमी भोज्य उत्पाद कहा जाता है, इसलिए क्योंकि इन्हें केवल तब ही खरीदा या उपभोग किया जा सकता है जब एक विशिष्ट मौसम के समय काटा जाता है। हम इस मामले में बहुत भाग्यशाली हैं, क्योंकि हम ऐसे स्थान पर रहते हैं जहां ऋतुओं के परिवर्तन में एक अलग सीमांकन का अनुभव किया जाता हैं जिसे भोजन और मौसम के द्वारा परिभाषित किया जा सकता है। जब हम एक मौसम से दूसरे में प्रवेश करते हैं तो मौसमी भोजन को खाना एक उत्सव का अनुभव प्रदान करता है। वास्तव में इसके पीछे एक जैविक कारण हैं कि क्यों वर्ष के एक निश्चित समय पर हम एक निश्चित प्रकार के भोज्य पदार्थ ही ग्रहण करते हैं? हमारी पोषण सम्बंधी जरूरतें मौसम के अनुसार बदलती रहती हैं। मौसमी भोजन तुलनात्मक रूप से अधिक ताज़ा, स्वादिष्ट और अधिक पौष्टिक होता है। स्थानीय खेतों पर उत्पादित मौसमी फल और सब्जियां अक्सर ताजा होती हैं, क्योंकि उन्हें लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं होती। अध्ययनों से पता चला है कि उन फल और सब्जियों में अधिक पोषक तत्व होते हैं, जिन्हें उनके मूल पौधे पर स्वाभाविक रूप से पकने के बाद निकालकर खाया जाता है। स्थानीय स्तर पर उगाए गए खाद्य पदार्थों की खरीद, स्थानीय खेतों की सहायता करती है और समुदाय में खेती और खुली जगह को बनाए रखती है। स्थानीय भोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था का भी समर्थन करता है।

स्थानीय किसानों और उत्पादकों के उत्पादों पर आप जो पैसा खर्च करते हैं, वह समुदाय में रहता है और अन्य स्थानीय व्यवसायों के साथ पुनर्निवेश किया जाता है। मौसमी फल हमारे शरीर की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं जैसे सर्दियों में हमारे पास कई प्रकार के खट्टे फल जैसे संतरे और कीवी होते हैं। इनमें विटामिन C की मात्रा उच्च होती है जो स्वाभाविक रूप से हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को सर्दी और जुकाम जैसी बीमारियों से लड़ने में मदद करती है। इसी तरह, गर्मियों के मौसमी फल हमें अतिरिक्त बीटा-कैरोटीन (Beta carotene) प्रदान करते हैं, जो हमें सूरज की तेज रोशनी से बचाने में सहायक हैं। मीठे फल और सब्जियों की प्रचुर मात्रा गर्म मौसम के दौरान प्राकृतिक रूप से ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने में मदद करती है। मौसमी फल और सब्जियां उपभोक्ताओं के लिए अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं। इसके अलावा मौसमी ताजा खाद्य पदार्थों का अपना पूर्ण स्वाद और पोषण मूल्य होता है। मौसमी खाद्य पदार्थ पर्यावरण अनुकूलित भी होते हैं। पतझड के मौसम में प्रायः गहरे नारंगी रंग की सब्जियों जैसे कद्दू, शकरकंद, सेब आदि का सेवन किया जाता हैं। इन फलों और सब्जियों में नारंगी रंग बीटा-कैरोटीन के कारण आता है। यह पोषक तत्व हमारे शरीर में विटामिन A में परिवर्तित हो जाता है, जोकि नेत्र स्वास्थ्य, विशेष रूप से रात की दृष्टि के लिए आवश्यक है। भले ही हम सभी साल भर स्ट्रॉबेरी (Strawberry) खाना पसंद करते हैं, लेकिन इन्हें खाने का सबसे अच्छा समय तब होता है जब इन्हें पकने के कुछ समय बाद सीधे स्थानीय उत्पादक से खरीदा जाता है। गर्मियों की इस चिलचिलाती धूप में ऐसे मौसमी फलों और सब्जियों का प्रयोग किया जाता है जो शरीर को ठन्डा रखने के साथ-साथ स्वस्थ भी रखे। पूरे भारत भर में गर्मियों के दौरान शीतल पेय पदार्थों के साथ-साथ ऐसे स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं जो शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। उदाहरण के लिए गुजरात में इन दिनों रस नो फजितो (Ras no Fajeto) को अत्यधिक पसंद किया जाता है।

गर्मियों के इस पारंपरिक व्यंजन को आम के गूदे और दही के साथ बनाया जाता है, तथा चावल के साथ परोसा जाता है। इसमें बीटा कैरोटीन, फ्लेवोनोइड (Flavonoids), विटामिन आदि पोषक तत्व होते है। इसके अलावा यहाँ दुधी के हलवे और लौकी को भी इस मौसम में अत्यधिक पसंद किया जाता है। सोमवंशी क्षत्रिय पथारे समुदाय मुंबई के मूल निवासियों में से एक हैं तथा वे गर्मियों के इन दिनों में समुद्री भोजन से अधिक हाट कडी (Haat kadi) को पसंद करते हैं। इस व्यंजन को उबले हुए कच्चे आम के गूदे को हाथ से निचोड़ कर बनाया जाता है। जब गूदा गाढ़ा हो जाता है, तो फिर नारियल का दूध, मिर्च डालकर सरसों का एक तड़का लगाया जाता है। इसमें एक अतिरिक्त सामग्री के रूप में गुड़ भी डाला जा सकता है। मंगलोरियन कैथोलिक भोजन में इन दिनों चिया (Chia) बीज से बनने वाले व्यंजन का सेवन किया जाता है। यह पाचन के लिए अच्छा होता है तथा इसमें अम्लता-रोधी गुण होते हैं। खाने को स्वादिष्ट बनाने के लिए इसे नारियल के पानी में मिलाया जाता है। मंगलोरियन कैथोलिक परिवार में कच्चे आम की चटनी भी अत्यधिक पसंद की जाती है, जो या तो मीठी या नमकीन हो सकती है।

इसके अलावा यहां आम का बफत (Bafat) भी इस मौसम अत्यधिक पसंद किया जाता ही जिसे आधे-कच्चे आम और बफत मसाले के द्वारा एक करी का रूप दिया जाता है। इसी प्रकार से केरल में इस समय मेम्बाझा पुलिस्सेरी (Kerala Mambazha Pulissery) व्यंजन लोकप्रिय होता है। मालवणी व्यंजन में इस समय कच्चे काजू और ताजा नारियल के साथ मिश्रित सब्जी तैयार की जाती है। इसके अलावा आम चटनी तथा आम पन्ना का सेवन भी किया जाता है। बंगाल में शुक्तो (Shukto) ग्रमियों का प्रसिद्ध व्यंजन है जिसे कच्चे केले, कद्दू, बैंगन, शकरकंद, करेले और लौकी इत्यादि के साथ बनाया जाता है।

चित्र (सन्दर्भ):
1. मुख्य चित्र में मेम्बाझा पुलिस्सेरी का चित्र है। (Youtube)
2. दूसरे चित्र में रस नो फजितो दिख रहा है। (Youtube)
3. तीसरे चित्र में हाट कढ़ी दिख रहा है। (wallpaperflare)
4. अंतिम चित्र में बफत दिखाया गया है। (Vimeo)
संदर्भ
1. https://www.seasonalfoodguide.org/why-eat-seasonally
2. https://www.onelifefitness.com/news/the-biological-benefits-of-seasonal-ingredients
3. https://thenaturalnutritionist.com.au/eating-seasonally/
4. https://food.ndtv.com/food-drinks/why-are-we-always-told-to-eat-seasonal-food-1737538
5. https://www.authenticook.com/blog/summer-foods-from-around-india/53/



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