Machine Translator

चींटियों द्वारा निभाई जाती है पारिस्थितिक तंत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका

रामपुर

 07-02-2020 09:30 AM
तितलियाँ व कीड़े

हमारे आसपास के सभी जन्तुओं में सबसे अधिक संख्या में पाए जाने वाली और समूह में रहकर जीवन-यापन करने वाली चींटियों की प्रकृति में उपस्थिति और पर्यावरण के प्रति किए जाने वाले कार्य पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चींटियाँ जैविक अपशिष्ट, कीड़े या अन्य मृत जानवरों का सेवन करके अपघटन का काम करती हैं, इस तरह वे पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद करती हैं। चींटियों द्वारा पृथ्वी के लगभग हर भू-भाग पर उपनिवेश किया हुआ है। केवल अंटार्कटिका (Antarctica) और कुछ दूरदराज़ या दुर्गम द्वीप में चींटियाँ नहीं पाई जाती हैं। चींटियां अधिकांश पारिस्थितिक तंत्रों में पनपती हैं और स्थलीय पशु बायोमास (Biomass) का 15-25% हिस्सा बनती हैं। इतने बड़े वातावरण में सफलतापूर्वक निवास करने के लिए उनकी सामाजिक संगठन और आवासों को संशोधित करने की उनकी क्षमता को ज़िम्मेदार ठहराया गया है।

पारिस्थितिकी तंत्र में चींटियों द्वारा निभाई जाने वाली भूमिका मनुष्यों के लिए भी काफी फायदेमंद होती हैं, जिसमें कीटों की आबादी का दमन और मिट्टी का वातन भी शामिल है। दक्षिणी चीन में सिट्रस (Citrus) की खेती में बुनकर चींटियों का उपयोग जैविक नियंत्रण के सबसे पुराने ज्ञात अनुप्रयोगों में से एक माना जाता है। वहीं बढ़ई चींटियां, जो मृत या रोगग्रस्त लकड़ी में अपने घोंसले बनाती हैं, लकड़ी की अपघटन प्रक्रिया को काफी तेज़ करती हैं। चींटियों के जाने के बाद, दीर्घाओं में कवक और बैक्टीरिया (Bacteria) उत्पन्न होते हैं, जो बड़ी सतहों पर लिग्निन (Lignin) और सेलूलोज़ (Cellulose) को तोड़ते हैं। चींटियों का भोजन दूसरे कीड़े और उनके अंडे होते हैं।

उनके प्राकृतिक आवास में, वे कई अकशेरूकीय और कशेरुकियों के भोजन का स्रोत होती हैं, जिनमें कठफोड़वा और अन्य कीटभक्षी शामिल हैं। भालू द्वारा भी बढ़ई चींटियों के लार्वा (Larvae) और प्यूपे (Pupae) खाया जाता है। केवल इतना ही नहीं दीर्घाओं और सुरंगों को खोदकर चींटियाँ मिट्टी को चीरने में मदद करती हैं। वे कंकड़ और कणों को शीर्ष पर लाकर मिट्टी को जोतती हैं। ये बीज में पाए जाने वाले पौष्टिक इलायोसोम (Elaiosome) को खाने के लिए अपनी सुरंग में ले जाते हैं, जिससे आमतौर पर नए पौधे भी उगते हैं।

वहीं सबसे रोचक तथ्य तो यह है कि अनुमानित रूप में यदि हम धरती पर मौजूद सभी चींटियों का वज़न लेंगे तो वह धरती में मौजूद सभी इंसानों के बराबर होगा। इस बात का दावा मूल रूप से हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एडवर्ड ओ विल्सन (Professor Edward O Wilson) और जर्मन जीवविज्ञानी बर्ट होल्डोब्लर (Bert Hoelldobler) ने अपनी 1994 की पुस्तक “जर्नी टू द आंट्स” (Journey To The Ants) में किया था। उन्होंने ब्रिटिश एंटोमोलॉजिस्ट (British Entomologist) सी बी विलियम्स (C B Williams) द्वारा पहले के एक अनुमान पर अपना अनुमान लगाया था, जिन्होंने एक बार गणना की थी कि एक निश्चित समय पर पृथ्वी पर जीवित रहने वाले कीटों की संख्या एक मिलियन ट्रिलियन थी।

क्या कभी आपने सोचा है कि भारत में कौन कौन सी चींटियाँ पाई जाती हैं? निम्न कुछ भारत में पाई जाने वाली चींटियों के नाम हैं :-
1)
मेरानोप्लस बायकलर (गुएरिन-मेनेविल, 1844) (Meranoplus bicolor (Guérin-Méneville, 1844))
2) ईकोफिला स्मरगडीना (फैब्रीशियस, 1775) (Oecophylla smaragdina (Fabricius, 1775)) - बुनकर चींटी
3) एनोप्लोलेपिस ग्रेसीलिप्स (स्मिथ, 1857) (Anoplolepis gracilipes (Smith, 1857)) -विनाशक चींटी
4) अफेनोगेस्टर बेकारी एमरी, 1887 (Aphaenogaster beccarii Emery,1887)
5) क्रैमाटोगेस्टर रोथनेई माय्र, 1879 (Crematogaster rothneyi Mayr, 1879)
6) कैम्पोनोटस रेडियेटस फ़ोरेल, 1892 (Camponotus radiatus Forel, 1892)
7) कैरबारा डायवर्सा (जेरडन, 1851) (Carebara diversa (Jerdon, 1851))

संदर्भ:
1.
https://en.wikipedia.org/wiki/Ant
2. https://www.sciencedaily.com/releases/2011/01/110131133227.htm
3. https://m.espacepourlavie.ca/en/ecological-importance-ants
4. https://harvardforest.fas.harvard.edu/ants/ecological-importance
5. https://www.bbc.com/news/magazine-29281253
6. https://www.antdiversityindia.com/common_indian_ants
चित्र सन्दर्भ:
1.
https://www.youtube.com/watch?v=cf3ZHWeeoo0



RECENT POST

  • कोरोना का परिक्षण महत्वपूर्ण क्यूँ ?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     06-04-2020 03:40 PM


  • क्या सच में प्रकृति के लिए वरदान है, कोविड - 19 (Covid – 19)?
    व्यवहारिक

     05-04-2020 03:45 PM


  • दांतों के विकारों में काफी लाभदायक होता है मौलसिरी वृक्ष
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     04-04-2020 01:20 PM


  • आंवला शहर में है रोहिलखंड के पहले नवाब अली मुहम्मद खान की कब्र
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     03-04-2020 04:00 PM


  • मातृका का इतिहास और पूजन की मान्यता
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     02-04-2020 04:30 PM


  • रोहिल्ला के सम्मान में रखा गया था एस.एस. रोहिल्ला जहाज़ का नाम
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     01-04-2020 05:00 PM


  • मानव के मस्तिष्क में कैसे पैदा होता है भय?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     31-03-2020 03:45 PM


  • विश्व भर के लिए रोगवाहक-जनित बीमारियां हैं एक गंभीर समस्या
    व्यवहारिक

     30-03-2020 02:50 PM


  • जीवन और मृत्यु के साथ का एक रूप है, द लाइफ ऑफ़ डेथ
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     29-03-2020 05:00 PM


  • कोरोनो विषाणु की अभूतपूर्व चुनौती का सामना करने हेतु किया जा रहा है अनेक योजनाओं का संचालन
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     28-03-2020 03:50 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.