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विश्व युद्धों में रामपुर के नवाब ने निभाई एक महत्वपूर्ण भूमिका

रामपुर

 26-11-2019 11:50 AM
उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

भारत द्वितीय विश्व युद्ध के समय ब्रिटिश शासन के अधीन रहा था चूँकि इस युद्ध में ब्रिटेन भी शामिल था और उन दिनों भारत पर ब्रिटेन का शासन था इसलिए भारत के सैनिकों को भी इस युद्ध में शामिल होना पड़ा। इस युद्ध में लगभग 25 लाख एशियाइयों ने युद्ध के सभी क्षेत्र (भूमि, समुद्र और हवा) में लड़ाई लड़ी थी, जिसके लिए भारतीय सेना ने कई पुरस्कार जीते, जिसमें 31 विक्टोरिया क्रॉस (Victoria Cross) भी शामिल थे। उस समय एशियाई वायुसेना में विमान-चालक और भूतल कर्मियों के रूप में शामिल हुए और साथ ही नाविकों द्वारा संपर्क के सभी साधनों को सक्रिय रखा गया। वहीं कई भारतीयों ने कारखानों में महत्वपूर्ण हथियारों और उपकरणों का उत्पादन करने का भी काम किया था।

वायरलेस ऑपरेटर (Wireless operator) नूर इनायत खान और स्क्वाड्रन लीडर महिंदर सिंह पुजजी इसके दो उल्लेखनीय उदाहरण हैं। नूर इनायत खान ने स्पेशल ऑपरेशंस एक्जीक्यूटिव (Special Operations Executive) के लिए काम किया और उनके द्वारा फ्रांस के क्षेत्र में घुसपैठ कर नाज़ी द्वारा युद्ध में प्रयोग की जाने वाली मशीनों पर हमला किया गया। वहीं इन्हें नाज़ी युद्ध के दौरान तैनात की गई जर्मन खूफिया पुलिस द्वारा धोखे से गिरफ्तार किया गया और इन्हें 1944 में दचाऊ में मार दिया गया। साथ ही महिंदर सिंह पुजजी 1940 में एक लड़ाकू हवाई जहाज चालक के रूप में आरएएफ (RAF) में शामिल हुए थे। इन्होंने युद्ध के तीन क्षेत्रों (यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और बर्मा) में अपने मिशन के लिए प्रतिष्ठित फ्लाइंग क्रॉस (Flying Cross) को जीता।

वहीं कुछ पुस्तकों में बताया गया है कि युद्ध के दौरान कोहिमा में, ब्रिटेन की भारतीय सेना के सैनिकों द्वारा ही मुख्य रूप से युद्ध लड़ा गया था। इस विश्व युद्ध में रामपुर के नवाब रज़ा अली खान बहादुर ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रज़ा अली खान 1930 से लेकर 1966 तक रामपुर रियासत के नवाब रहे। वे एक सहिष्णु और प्रगतिशील शासक थे जिन्होंने अपनी सरकार में हिंदुओं की संख्या का विस्तार किया था। रियासत में उन्होंने सिंचाई प्रणाली का विस्तार, विद्युतीकरण आदि परियोजनाओं को पूरा करने के साथ-साथ स्कूलों, सड़कों और निकासी प्रणाली का निर्माण भी किया।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान देशभक्त नवाब ने अपने सैनिकों को विश्व युद्ध में भाग लेने के लिये भेजा जहां इनके सैनिकों ने बहुत बहादुरी के साथ अपना शक्ति प्रदर्शन किया। द्वितीय विश्व युद्ध ने विभाजन के दौरान हिंसा को भी प्रभावित किया।

संदर्भ:
1.
https://bit.ly/3374d9v
2. https://www.bl.uk/learning/timeline/item124212.html
3. https://bit.ly/2ONsrjY
4. https://www.rediff.com/news/interview/how-world-war-ii-changed-india/20160524.htm



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