विभिन्न लिपियों की जननी, गुप्त लिपि की उत्पत्ति

रामपुर

 14-10-2019 02:34 PM
ध्वनि 2- भाषायें

मानव के विकास में, अर्थात मानव-सभ्यता के विकास में, वाणी के बाद लेखन का ही सबसे अधिक महत्व है। अन्य पशुओं से आदमी को इसीलिए श्रेष्ठ माना जाता है कि वह वाणी द्वारा अपने मनोभावों को व्यक्त कर सकता है। किंतु मानव का बहुमुखी विकास इस वाणी को लिपिबद्ध करने की कला के कारण ही हुआ। भारत में विभिन्न भाषाओं के साथ-साथ विभिन्न लिपियाँ भी मौजूद हैं, तो चलिए आज जानते हैं ‘गुप्त लिपि’ की उत्पत्ति के बारे में।

गुप्त लिपि (जिसे गुप्त ब्रह्मी लिपि भी कहते हैं) भारत में गुप्त साम्राज्य के काल में संस्कृत लिखने के लिए प्रयोग की जाती थी। गुप्त साम्राज्य भौतिक समृद्धि और महान धार्मिक और वैज्ञानिक विकास का दौर था। इसने आगे चलकर देवनागरी, गुरुमुखी, तिब्बतन और बंगाली-असमिया लिपियों को जन्म दिया। गुप्त लिपि अपनी पूर्ववर्ती और उत्तराधिकारी लिपियों के समान ही है, बस केवल वर्णिम और विशेषक के आकार और रूप अलग-अलग होते हैं।

चौथी शताब्दी में अधिक तेज़ी और सौंदर्य पूर्ण रूप से लिखने के परिणामस्वरूप इसकी वर्णमाला ने अधिक सुन्दर और सममित रूप लेना शुरू कर दिया। वहीं यह लिपि साम्राज्य भर में और अधिक भिन्नता भरी हो गई, क्षेत्रीय बदलावों के साथ, इन्हें मोटे तौर पर तीन, चार या पांच श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया। हालाँकि, एक निश्चित वर्गीकरण स्पष्ट नहीं है, क्योंकि किसी भी शिलालेख में एक विशेष प्रतीक को भी अलग-अलग रूप से लिखा हुआ हो सकता है।

गुप्त लिपि से लिखे गए शिलालेख ज़्यादातर लोहे या पत्थर के खंभों पर, और गुप्त वंश के सोने के सिक्कों पर पाए जाते हैं। वहीं इनमें सबसे महत्वपूर्ण ‘इलाहाबाद प्रशस्ति’ था, जिसे समुद्रगुप्त के मंत्री हरिशेना द्वारा निर्मित किया गया था जो समुद्रगुप्त के शासनकाल का वर्णन करता है। गुप्त लिपि अशोक के इलाहाबाद स्तंभ पर भी अंकित है। वहीं गुप्त सिक्कों का अध्ययन 1783 में सोने के सिक्कों के एक ढेर की खोज के साथ शुरू हुआ था। कई अन्य ऐसे ढेरों की भी खोज की गई, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण 1946 में खोजा गया बयाना (राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित) ढेर था, जिसमें गुप्त राजाओं द्वारा जारी किए गए 2000 से अधिक सोने के सिक्के शामिल थे।

गुप्त साम्राज्य के कई सिक्के किंवदंतियों के अभिलेख या ऐतिहासिक घटनाओं को चिह्नित करते हैं। यह ऐसा करने वाले पहले भारतीय साम्राज्यों में से एक थे, जो कि शायद इस साम्राज्य की अभूतपूर्व समृद्धि के परिणामस्वरूप था। पहले गुप्त राजा चंद्रगुप्त प्रथम से लेकर लगभग प्रत्येक गुप्त राजा द्वारा सिक्के जारी किए गए थे। स्तंभों आदि पर लिखी लिपियों की तुलना में सिक्के पर लिपियों की एक अलग प्रकृति देखी गई है, जो कि शायद क्षेत्रीय विविधताओं को सिक्कों पर प्रकट होने से रोकने के लिए किया गया था। इसके अलावा एक और कारण यह है कि, चांदी के सिक्कों पर सीमित जगह थी।

संदर्भ:
1.https://howlingpixel.com/i-en/Gupta_script
2.https://www.revolvy.com/page/Gupta-script?cr=1
3.https://en.wikipedia.org/wiki/Gupta_script
4.https://www.britannica.com/topic/Gupta-script


RECENT POST

  • एकांत जीवन निर्वाह करना पसंद करती मध्य भारत की रहस्यमय बैगा जनजाति का एक परिचय
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     30-06-2022 08:33 AM


  • कोविड-19 के नए वेरिएंट, क्यों और कहां से आ रहे हैं?
    कोशिका के आधार पर

     29-06-2022 09:16 AM


  • पश्चिमी पूर्वी वास्तुकला शैलियों का मिश्रण, अब्दुस समद खान द्वारा निर्मित रामपुर की दो मंजिला हवेली
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     28-06-2022 08:12 AM


  • क्या क्वाड रोक पायेगा हिन्द प्रशांत महासागर से चीन की अवैध फिशिंग?
    मछलियाँ व उभयचर

     27-06-2022 09:23 AM


  • प्राकृतिक इतिहास में विशाल स्क्विड की सबसे मायावी छवि मानी जाती है
    शारीरिक

     26-06-2022 10:01 AM


  • फसल को हाथियों से बचाने के लिए, कमाल के जुगाड़ और परियोजनाएं
    निवास स्थान

     25-06-2022 09:46 AM


  • क्यों आवश्यक है खाद्य सामग्री में पोषण मूल्यों और खाद्य एलर्जी को सूचीबद्ध करना?
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     24-06-2022 09:47 AM


  • ओपेरा गायन, जो नाटक, शब्द, क्रिया व् संगीत के माध्यम से एक शानदार कहानी प्रस्तुत करती है
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     23-06-2022 09:28 AM


  • जीवन जीने के आदर्श सूत्र हैं , महर्षि पतंजलि के अष्टांग योगसूत्र
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     22-06-2022 10:18 AM


  • कहीं आपके घर के बाहर ही तो नहीं है लाखों रुपयों के ये कीड़े
    तितलियाँ व कीड़े

     21-06-2022 09:42 AM






  • © - , graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id