रामपुर रज़ा लाइब्रेरी

रामपुर

 28-07-2017 02:12 PM
वास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली

रामपुर नवाबों का वह शहर है जहाँ ना ही सिर्फ उन्होंने राज किया बल्की रामपुर की धरोहर, वहाँ की सभ्यता एवं इतिहास का संरक्षण कर वहाँ की मिट्टी का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए| रज़ा पुस्तकालय भारत ही नही बल्की दक्षिण मध्य एशिया का एक अहम पुस्तकालय है। यहाँ का संग्रह अन्य किसी और पुस्तकालय में नहीं मिलता| यह इंडो-इस्लामिक विद्या एवं विद्वत्ता का खजाना छिपाये है। यह पुस्तकालय इंडो-सर्सेनिक वास्तुकला पर आधारित है जो की नवाब फैज़ुल्लाह खान द्वारा सन् 1774 में स्थापित की गयी थी| रामपुर के नवाबों की खासियत यह थी की वे कला एवं साहित्य के संरक्षक थे – साहित्यकार, कवी, ग़ज़ल लेखक, चित्रकार, संगीतकार, नृतक, लेखक, उलेमा, इत्यादि को नवाबों के अंतर्गत संरक्षण मिला जिसके परिणामस्वरूप हम यहाँ के पुस्तकालय में कई रचनाओं को देख सकते हैं| रामपुर पुस्तकालय में लगभग 1700 पांडुलिपियाँ, 6000 किताबें, 3000 इस्लामिक हस्तलिपि एवं 205 ताड़पत्र हैं| सारी 1700 पांडुलिपियाँ - संस्कृत, उर्दू, फ़ारसी, हिंदी, अरबी, तुर्की भाषाओं में है| यहाँ पर रज़ा संग्रहालय जुलाई 19, 1997 हमिंद मंजिल में स्थापित हुई।नवाब मुहम्मद सईद खान ने रजा पुस्तकालय में कई नए कमरे एवं अलग -अलग विभाग बनवायें|

यहाँ का इस्लामिक हस्तलिपि का संग्रह – इकलौता ऐसा संग्रह है जहाँ विश्व भर के हस्तलिपियों के प्रमाण देखने मिलते हैं| फ़ारसी के हस्तालेखकों का कार्य हम यहाँ देख सकते है जैसे – मीर अली, मुहम्मद हुसैन कश्मीरी, ज़र्रिन रक़म, सुल्तान अली मशदी, दारा शिकोह, गुलज़ार रक़म, मुहम्मद रफ़ी, मुहम्मद हाशिम इत्यादि| रामपुर के कई हस्तलेखकों का भी संग्रह यहाँ की विरासत में चार चाँद लगता है जैसे मुहम्मद सलामुल्लाह रामपुरी, हाफिज़ अहमद अली खान शौक़, मीर इवज़ अली आदिल मलीहाबादी इत्यादि| चित्रकारी की बात करें तो यहाँ मंगोल, ईरानी, मुग़ल, दक्खिनी, राजपूत, पहाड़ी, अवधी, ब्रिटिश इत्यादि हैं| यहाँ पर 35 चित्राधार, तस्वीर एवं लघुचित्र के प्रमाण हैं जिसमे चार हज़ार से भी ज्यादा ऐतिहासिक चित्रों का संग्रह है। रामपुर के रज़ा पुस्तकालय के चित्र, पांडुलिपियाँ इत्यादि भारत के बाहर कई प्रदर्शनियों में प्रस्तुत की गयी हैं जैसे - इंडो-इस्लामिक हस्तलिपि की 2015 प्रदर्शनी जो की मॉरिशस में फेस्टिवल ऑफ़ इंडिया – 2015 के नाम से हुई जहां रामपुर रज़ा पुस्तकालय की 50 इस्लामिक हस्तलिपियों को प्रदर्शित किया गया था| मलेशिया में कुआलालम्पुर एवं कोट बहरू में रज़ा पुस्तकालय के इस्लामिक हस्तलिपियों के चित्र प्रदर्शित किये गए थे (अप्रैल 12 2015)|

रमजान के महीने में यहाँ दरबार हॉल में कुरान एवं इस्लामिक हस्तलिपि पर प्रदर्शनी लगायी जाती है। रज़ा पुस्तकालय का संग्रह रामपुर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है जो बाकी किसी पुस्तकालय एवं संग्रहालय में नहीं दिखता।

1.http://razalibrary.gov.in/razalibnew/41st%20English%20Annual%20Report.pdf
2. http://razalibrary.gov.in/persian.asp
3. http://www.indiaculture.nic.in/rampur-raza-library-rampur
4. http://razalibrary.gov.in/Razalibnew/Razalibinner.html



RECENT POST

  • महात्मा गाँधी के मदद से कैसे बनी चमड़े की चप्पले भारतीय आत्मनिर्भरता का प्रतीक
    स्पर्शः रचना व कपड़े

     19-03-2019 07:00 AM


  • इस्लामी वास्तुकला में रंगों का महत्व
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     18-03-2019 07:45 AM


  • तितलियों का कायांतरण - आखिर कैसे बड़ी होती है तितलियां
    तितलियाँ व कीड़े

     17-03-2019 09:00 AM


  • आखिर भारत में लौह उद्योग को आज किन चुनौतियों का सामना करना पर रहा है
    खदान

     16-03-2019 09:00 AM


  • क्या होता है जंक डीएनए?
    डीएनए

     15-03-2019 09:00 AM


  • रामपुर की एक महिला ने किया था ख़िलाफ़त आन्दोलन में गाँधी जी का सहयोग
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     14-03-2019 09:00 AM


  • घौंसले में रहने वाली चींटी
    तितलियाँ व कीड़े

     13-03-2019 09:00 AM


  • गणितीय पहाड़ों का उदगमन
    धर्म का उदयः 600 ईसापूर्व से 300 ईस्वी तक

     12-03-2019 09:00 AM


  • वन संरक्षण की एक मुहिम चिपको आंदोलन
    आधुनिक राज्य: 1947 से अब तक

     11-03-2019 12:41 PM


  • रोज़ के भाग दौर भरी जिंदगी में फसा एक युवक
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     10-03-2019 12:39 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.