Machine Translator

21वीं सदी में शिक्षा में आते परिवर्तन

रामपुर

 05-09-2019 11:41 AM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

प्रत्येक वर्ष 5 सितम्बर के दिन को भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। शिक्षक दिवस का यह पर्व विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए कई मायनों में ख़ास होता है। अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर के दिन विश्व के लगभग सभी देशों में मनाया जाता हैं जिसकी शुरुआत 1994 में यूनेस्को (UNESCO) द्वारा की गई थी। भारत में शिक्षक दिवस हर 5 सितम्बर के दिन डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के रुप में मनाया जाता है। विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में विभिन्न प्रकार के आयोजन किए जाते हैं ताकि शिक्षकों और छात्रों के बीच का ज्ञानवर्धक रिश्ता और भी मज़बूत हो सके। दुनिया में शिक्षण वास्तव में, सबसे प्रभावशाली नौकरियों में से एक है जिसकी परम्परा सदियों पहले से चली आ रही है जिसका उदाहरण प्राचीन काल की गुरु-शिष्य परंपरा है। विभिन्न देशों में शिक्षक दिवस के दिन शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने हेतु विभिन्न शिक्षकों को राष्ट्रीय और अलग-अलग प्रकार के सम्मान दिए जाते हैं। सबसे पहले शिक्षक दिवस 1773 में पोलैंड में मनाया गया था तथा चीन में 1985 में शिक्षक दिवस की स्थापना की गयी थी। संयुक्त राष्ट्र ने 1994 से विश्व शिक्षक दिवस मनाना प्रारम्भ किया। शिक्षक दिवस के पर्व पर कई शिक्षक भर्ती अभियान, सम्मेलन आदि चलाए जाते हैं ताकि शिक्षकों के महत्व पर ज़ोर दिया जा सके। कनाडा में, शिक्षकों के महत्त्व को बढ़ाने के लिए सार्वजनिक जागरूकता अभियान आयोजित किए जाते हैं।

अफसोस की बात तो यह है कि जहां शिक्षक दिवस के दिन शिक्षा और शिक्षकों के अस्तित्व पर ज़ोर दिया जाता है, वहीं वर्तमान में शिक्षण एक नापसंद कैरियर (Career) बनता जा रहा है। धीरे-धीरे युवाओं की रुचि इस क्षेत्र में कम होती जा रही है। जिसके परिणामस्वरुप विद्यालयों में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर बड़े पैमाने पर शिक्षकों की कमी नज़र आती है। आंकड़ों के अनुसार दुनिया को लगभग 69 मिलियन नए शिक्षकों की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा तक पहुँचने के लिए लगभग 2.44 करोड़ शिक्षकों की आवश्यकता है। शिक्षण में घट रही रुचि के कई कारण हो सकते हैं जिनमें कम वेतन, शिक्षक अनुबंध, बेहतर व्यावसायिकता के लिए सीमित अवसर, असंतोषजनक शिक्षा बजट आदि शामिल हैं। एक दूसरा कारण यह भी है कि राजनैतिक नेता सार्वजनिक शिक्षा के महत्व को नहीं समझ पाते और अधिकतर खुद अपने बच्चों को अच्छी तरह से संपन्न निजी स्कूलों में भेजते हैं। उनके लिए, सार्वजनिक शिक्षा एक निवेश नहीं बल्कि एक व्यय है। इस कारण भी शिक्षकों को मिलने वाले वेतन में कमी आती है।

21वीं सदी जहाँ अपने साथ तकनीक और प्रौद्योगिकी के विकास को लायी है वहीं इसका प्रभाव वर्तमान शिक्षा पर भी देखने को मिल रहा है। अब शिक्षक शिक्षा को तकनीक और प्रौद्योगिकों से जोड़ने की ओर अग्रसर हैं। वैश्वीकरण के इस दौर में 21वीं सदी की शिक्षा सूचना और संचार प्रौद्योगिकी पर आधारित शिक्षा है। ये शिक्षा स्कूल की कक्षा से लेकर शिक्षा के हर क्षेत्र तक जाती है। 21वीं सदी की शिक्षा का मुख्य लक्ष्य वर्ल्ड क्लास एजुकेशन (World class education) अर्थात विश्व-स्तरीय शिक्षा स्थापित करना है। यह शिक्षण केवल एक विषय के ज्ञान पर ही नहीं बल्कि अन्य विषयों के ज्ञान पर भी आधारित है। 21वीं सदी में एक शिक्षक के लिए आवश्यक है कि वो शिक्षण में होने वाले हर बदलाव के लिए तैयार रहे क्योंकि कंप्यूटर (Computer) के इस युग में बच्चे केवल एक ही नहीं बल्कि कई तरह के कौशल हासिल कर सकते हैं और ऐसा तभी संभव है जब शिक्षक भी स्वयं उन कौशलों से युक्त हों। इनमें से कुछ कौशल निम्नलिखित हैं:
• रचनात्मकता और नवाचार कौशल
• साक्षरता की जानकारी
• संचार कौशल
• मीडिया (Media) कौशल
• महत्त्वपूर्ण सोच और समस्या का समाधान
• नेतृत्व और ज़िम्मेदारी
वर्तमान में एक अच्छे शिक्षक के लिए आवश्यक है कि वह उपरोक्त सभी कौशलों को बच्चों में विकसित करने में सक्षम हो।

सन्दर्भ:
1.
https://bit.ly/2lxwfv2
2. https://www.academia.edu/40181063/History_Education_Global_Education



RECENT POST

  • मानव शरीर में मौजूद हैं असंख्य लाभकारी सूक्ष्मजीव
    कीटाणु,एक कोशीय जीव,क्रोमिस्टा, व शैवाल

     18-09-2019 11:12 AM


  • उत्तर भारत की प्रसिद्ध मिठाई है खाजा
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     17-09-2019 11:12 AM


  • प्रत्येक मानव में पाई जाती है आनुवंशिक भिन्नता
    डीएनए

     16-09-2019 01:38 PM


  • कैसे किया एक इंजीनियर ने भारत में दुग्ध क्रांति (श्वेत क्रांति) का आगाज
    आधुनिक राज्य: 1947 से अब तक

     15-09-2019 02:39 PM


  • रामपुर के नज़दीक ही स्थित हैं रोहिल्ला राजाओं के प्रमुख स्थल
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     14-09-2019 10:30 AM


  • शुरुआती दिनों की विरासत हैं रामपुर स्थित फव्वारे
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     13-09-2019 01:44 PM


  • विलुप्त होने की स्थिति में है मेंढकों की कई प्रजातियाँ
    मछलियाँ व उभयचर

     12-09-2019 10:30 AM


  • सर्गेई प्रोकुडिन गोर्स्की द्वारा रंगीन तस्वीर लिए जाने का इतिहास
    द्रिश्य 1 लेंस/तस्वीर उतारना

     11-09-2019 12:17 PM


  • इस्लाम में चंद्रमा को देख मनाया जाता है मोहर्रम
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     10-09-2019 02:30 PM


  • सबका मन मोहता इंद्रधनुषी मोर पंख
    पंछीयाँ

     09-09-2019 12:32 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.