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क्या वास्तव में अपराध के विषय में देश के लिये आदर्श हैं रामपुर के गांव?

रामपुर

 19-07-2019 11:42 AM
व्यवहारिक

वर्तमान में कोई भी अखबार या समाचार चैनल (Channel) ऐसा नहीं है जिसमें एक भी दिन देश में हो रहे अपराधों की खबर प्रसारित न की गयी हो। देश में इतने कानून नियम होने के बाद भी दिन-प्रतिदिन अपराधों की संख्या बढ़ती जा रही है तथा इनसे निपटते-निपटते अब सरकार भी थक चुकी है। किंतु 2013 की राष्ट्रीय अपराधिक रिपोर्ट (Report) के अनुसार उत्तरप्रदेश का रामपुर एक ऐसा स्थान है जहां आंकड़ों के अनुसार अपराधों की संख्या देश की अपेक्षा में बहुत कम है। रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश की राष्ट्रीय अपराध दर 218.67 थी जिसकी तुलना में रामपुर की अपराधिक दर (84.34) बहुत कम थी। 2013 में रामपुर में केवल 1,970 अपराध ही सामने आए जिनमें सर्वाधिक होने वाला अपराध लूटपाट था जबकि सबसे कम होने वाला अपराध चोरी को बताया गया। अपराधिक रिकॉर्ड (Record) में रामपुर 371वें स्थान पर था।

किंतु अगर अंदरूनी जानकारी को देखें तो यहां के कई स्थानों पर वास्तविकता कुछ और ही है। दरसल इन स्थानों पर अधिकतर हत्याओं को दुर्घटनाओं का रूप दिया जा रहा है जिसके कारण कानून के माध्यम से भू-माफियाओं और अपराधियों की ताकत और भी अधिक बढ़ती जा रही है। उदाहरण के लिये यदि किसी व्यक्ति की हत्या करनी हो तो उसके लिये एक ड्राइवर (Driver) को नियुक्त किया जाता है ताकि जो घटना घटित हुई वह अपराध नहीं दुर्घटना लगे। इस प्रकार हत्या का कारण लापरवाही को बता दिया जाता है और अपराधी को मात्र 2 वर्ष की ही सज़ा होती है। जबकि यदि यह पता लग जाये कि हत्या योजनाबद्ध तरीके से की गयी है तो अपराधी को उम्रकैद की सज़ा हो सकती है। इसी प्रकार किसी की निजी संपत्ति को हड़पने के लिये उस पर भारतीय दण्ड संहिता (आईपीसी) 376 (बलात्कार) की धारा लगवा दी जाती है। किंतु वास्तव में संपत्ति विवाद मामले में उस व्यक्ति पर दबाव बनाने के लिए ऐसा किया गया होता है। भू-माफिया भी किसी एक ज़मीन को कई लोगों में बेच देते हैं और तब तहसील (स्थानीय राजस्व कार्यालय) में सौदे को सत्यापित करने के लिए खरीददार की ओर से कुछ लापरवाही की उम्मीद करते हैं ताकि उन्हें हर प्रकार से फायदा हो। इसी प्रकार यहां काफी मामलों में लूटपाट, चोरी, डकैती, संपत्ति विवादों, हत्याओं आदि अपराधों को दूसरा रूप देकर कानून की पहुंच से बचाया जा रहा है।

लेकिन रामपुर में कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां अपराधों की संख्या वास्तव में बहुत कम है। उदाहरण के लिये 2000 की आबादी वाला एक आदर्श गांव जो कि बादपुर ब्लॉक (Block) रामपुर में स्थित है, में करीब 19 साल से कोई भी एफ.आई.आर. (प्रथम सूचना विवरण - First Information Report) दर्ज नहीं करायी गयी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां जो मामूली विवाद होते हैं उन्हें आपस में ही सुलझा लिया जाता है जिससे एफ.आई.आर. दर्ज कराने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती। मामलों को बहुत अनुशासित और शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझा लिया जाता है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार 2016 में उत्तरप्रदेश राज्य में अपराधिक मामले बहुत अधिक थे किंतु यहां स्थित रामपुर के एक गांव कल्याणपुर में पिछले 40 सालों से कोई आपराधिक मामला सामने नहीं आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार अधिकांश निवासी मजदूर हैं और अपनी जीविका कमाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। उनके पास झगड़े और पुलिस मामलों के लिये कोई समय ही नहीं है। अगर कोई विवाद हो भी जाते हैं तो उन्हें आपस में सुलझा लिया जाता है।

ये गांव वास्तव में राज्य के लिये आदर्श हैं जो सिखाते हैं कि शांतिपूर्ण और समृद्ध वातावरण में कैसे रहा जा सकता है। हालांकि ये बात भी सच है कि यहाँ पर भी दूसरे स्थानों की भाँती एक कानूनी तरीके से अपराध होना संभव है।

संदर्भ:
1. http://www.neighbourhoodinfo.co.in/crime/Uttar-Pradesh/Rampur
2. https://bit.ly/2XP4BvH
3. https://bit.ly/2GjDBJV
4. https://bit.ly/30HjrS4



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