विलुप्‍ति की कगार पर खड़ा द ग्रेट इंडियन बस्टर्ड

रामपुर

 15-05-2019 11:00 AM
पंछीयाँ

पक्षी प्रेमियों के लिए भारतीय उपमहाद्वीप लोकप्रिय स्‍थानों में से एक है, जहां बहुसंख्‍यक प‍क्षी प्रजातियां पायी जाती हैं। विश्व भर के पक्षियों की सूची बनाने वाली वेबसाइट (Website) एविबेस (Avibase) के आंकडों के अनुसार मात्र रामपुर में ही पक्षियों की लगभग 394 प्रजातियां मौजूद हैं। भारत स्‍थानीय ही नहीं वरन् अनेक प्रवासी पक्षियों का भी घर है, किंतु धीरे-धीरे यहाँ पक्षियों की संख्‍या घटती नज़र आ रही है। कई पक्षी विलुप्‍त हो गए हैं तो कई विलुप्ति की कगार पर खड़े हैं। भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला ‘द ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ (The Great Indian Bustard) एक शानदार पक्षी है। शतुरमुर्ग के समान दिखने वाला यह पक्षी सबसे भारी पक्षियों में से एक है। लगभग एक मीटर लंबे इस पक्षी का शरीर क्षैतिज और पैर लंबे होते हैं। काले सफेद रंग के इन पक्षियों में मादाएं प्रायः आकार में छोटी होती हैं। ये पक्षी पानी पीने के दौरान गर्दन उठाकर आस-पास के क्षेत्र का निरीक्षण भी करते हैं, यदि किसी प्रकार के खतरे का आभास होता है तो मादाओं को छोटे चूज़ों को अपने पंख में छिपाकर सुरक्षित स्‍थान में ले जाने के निर्देश दे दिए जाते हैं। यह मुख्‍यतः खुले घास के मैदानों में रहना पसंद करते हैं तथा भोजन के रूप में मौसमी घास, कीड़े-मकोड़े, सरिसृप जंतु इत्‍यादि खाते हैं।

ऊपर दिए गये चित्र में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के चित्र वाला भारतीय डाक द्वारा ज़ारी किया गया टिकट है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ ने इसे संकटग्रस्‍त पक्षियों की सूची में शामिल किया है। इसका अनुमान आप इन आंकडों से लगा सकते हैं कि वर्ष 2011 में भारतीय उपमहाद्वीप के शुष्‍क क्षेत्रों में इनकी संख्‍या 250 आंकि गयी थी जो 2018 तक 150 रह गयी। इंडियन बस्टर्ड आज शिकार और निवास स्‍थान को पहुंचने वाली हानि की समस्‍या से जूझ रहे हैं क्‍योंकि यह पक्षी मुख्‍यतः एक ही स्‍थान पर निवास करते हैं, जो शुष्‍क और अर्धशुष्‍क घास के मैदान हैं। कई क्षेत्रों, जैसे राजस्‍थान, में आज शुष्‍क क्षेत्रों में सिंचाई नहर पहुंचाकर उन्‍हें कृषि योग्‍य भूमि में परिवर्तित कर दिया गया है। जिस कारण इनके निवास स्‍थान को काफी हानि पहुंची है। इसके साथ ही इन पक्षियों के लगभग 95% ऐतिहासिक निवास क्षेत्रों में विकास कार्य जैसे रोड, कारखानों आदि का निर्माण कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त कई परियोजनाओं ने घास के मैदानों को परिवर्तित कर दिया है जिसे भारत सरकार ने ‘बंजर भूमि’ घोषित किया था। अवैध शिकार, बिजली के तारों, वाहनों इत्‍यादि से टकराने के कारण भी इन पक्षियों की संख्‍या तीव्रता से घटती जा रही है। समालोचकों के अनुसार भारत में अक्षय ऊर्जा का विकास भी इनके विलुप्त होने के लिये उत्तरदायी है। पिछले कुछ वर्षों में, गुजरात, राजस्थान और अन्य राज्यों में प्रमुख बस्टर्ड निवास स्‍थान उच्च वोल्टेज (Voltage) बिजली लाइनों से तबाह हो गए हैं। कॉर्बेट फाउंडेशन (Corbett Foundation) ने ऐसे कई मामलों का दस्तावेजीकरण किया जहां बस्टर्ड निवास और उनके प्रवासी मार्गों में बिजली की लाइनें बनाई गई हैं। भारी वजन और घूमने के लिए सीमित क्षेत्र होने के कारण बस्टर्ड को इन विद्युत लाइनों से बचने में परेशानी होती है और अक्‍सर वे बिजली का शिकार हो जाते हैं।

पिछले एक दशक में कम से कम 10 या करीब 15 पक्षी उन बिजली लाइनों द्वारा मारे गए। इस प्रकार से मारे गए पक्षियों में से महाराष्ट्र राज्य में रहने वाले दोनों नर बस्टर्ड थे। गुजरात क्षेत्र के अन्य नर पक्षियों की मृत्यु भी संभवतः प्रजनन क्षेत्रों में नव स्थापित विद्युत लाइनों से टकराने से हो रही है। भारत में नवीकरणीय-ऊर्जा परियोजनाओं को पर्यावरणीय प्रभाव के आकलन की आवश्यकता नहीं है, इस मान्यता ने इन पक्षियों को विशेष रूप से असुरक्षित छोड़ दिया है। भारत ने अप्रैल 2017 और मार्च 2018 के बीच 12,000 मेगावाट की अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को शुरू किया तथा वर्ष 2022 तक 1,75,000 मेगावाट की अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं शुरू कर दी जाएंगी। जो इन पक्षियों के ऊपर भावी संकट को इंगित कर रही हैं। रामपुर में लुप्तप्राय, संकटग्रस्त और संवेदनशील प्रजातियों के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं:
लुप्तप्राय प्रजातियां:

1. सफेद सिर वाला बत्तख (White-headed Duck)
2. लेसर फ्लोरिकन (Lesser Florican)
3. ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Great Indian Bustard)
4. बंगाल फ्लोरिकन (Bengal Florican)
संकट्ग्रस्त प्रजातियां:
1. फेरुगिनस डक (Ferruginous Duck)
2. फलकटेड डक (Falcated Duck)
3. ग्रेटर स्टोर्क (Greater or Painted Stork)
4. काले गर्दन वाले सारस (Black-necked Stork)
संवेदनशील प्रजातियां
1. पोचार्ड (Common Pochard)
2. सार्स क्रेन (Sarus Crane)
3. लेसर अडजुटेंट (Lesser Adjutant) भारतीय स्कीमर (Indian Skimmer)

संदर्भ:
1. https://avibase.bsc-eoc.org/checklist.jsp?region=INggupra&list=howardmoore
2. https://avibase.bsc-eoc.org/species.jsp?avibaseid=2799567A50B2B6C5
3. https://therevelator.org/great-indian-bustard-extinct/
4. https://en.wikipedia.org/wiki/Great_Indian_bustard
5. https://countercurrents.org/2019/03/01/an-indian-icon-the-great-indian-bustard/



RECENT POST

  • आधुनिकीकरण के दौर में कला का क्षेत्र तकनीकी रूप से क्रंतिकारी बदलावों को देख रहा है
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     06-07-2022 09:29 AM


  • आज हमें खाद्य प्रणालियों की पुनर्कल्पना के लिये इसे जलवायु परिवर्तन अनुकूलन बनाना आवश्यक है
    जलवायु व ऋतु

     05-07-2022 10:06 AM


  • हमारे पहाड़ी राज्यों के मीठे-मीठे सेब उत्पादकों की बढ़ती दुर्दशा को समझना हैं ज़रूरी
    साग-सब्जियाँ

     04-07-2022 10:09 AM


  • "दुनिया का पहला मंदिर" के रूप में प्रसिद्ध है गोबेकली टेप
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     03-07-2022 10:54 AM


  • हमारे अद्वैत दर्शन के समान ही थे 17वीं शताब्दी के क्रांतिकारी डच दार्शनिक स्पिनोज़ा के विचार
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     02-07-2022 09:55 AM


  • रामपुर सहित भारत के बाहर भी मचती है, प्रसिद्ध रथ यात्रा की धूम
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     01-07-2022 10:19 AM


  • एकांत जीवन निर्वाह करना पसंद करती मध्य भारत की रहस्यमय बैगा जनजाति का एक परिचय
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     30-06-2022 08:33 AM


  • कोविड-19 के नए वेरिएंट, क्यों और कहां से आ रहे हैं?
    कोशिका के आधार पर

     29-06-2022 09:16 AM


  • पश्चिमी पूर्वी वास्तुकला शैलियों का मिश्रण, अब्दुस समद खान द्वारा निर्मित रामपुर की दो मंजिला हवेली
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     28-06-2022 08:12 AM


  • क्या क्वाड रोक पायेगा हिन्द प्रशांत महासागर से चीन की अवैध फिशिंग?
    मछलियाँ व उभयचर

     27-06-2022 09:23 AM






  • © - , graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id