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मैकडॉनल्ड्स के फिले-ओ-फिश (Filet-O-Fish) सैंडविच की रोचक कहानी

रामपुर

 19-04-2019 10:17 AM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

आज गुड फ्राइडे (Good Friday) है, इस त्यौहार को समस्त विश्व में ईसाई धर्म के लोग प्रति वर्ष बड़े ही उत्साह के साथ मनाते है। गुड फ्राइडे का अगर अंग्रेज़ी मतलब निकाले तो इसका अर्थ होगा एक शुभ शुक्रवार या अच्छा शुक्रवार, परन्तु वास्तव में इस त्यौहार को एक शोक के दिन के रूप में स्मरण किया जाता है। कहते है कि इसी शुक्रवार के दिन यीशु को सूली पर चढ़ाया गया था, जिस कारण इस दिन को ब्लैक फ्राइडे (Black Friday) भी कहा जाता है।

वैसे तो इसाई धर्म के लोग मांस का सेवन करने में बहुत रुचि रखते है परन्तु गुड फ्राइडे और ईस्टर (Easter) के दिनों में यह किसी भी प्रकार का मांसाहारी भोजन नहीं करते है। चूंकि गुड फ्राइडे के दिन यीशु ने हम मनुष्यों के लिए अपना मांस का (देह का) बलिदान किया था, इसलिए शुक्रवार को उनके सम्मान में मांस का परहेज किया जाता हैं। 1966 तक चर्च कानून ने पूरे वर्ष भर के सभी शुक्रवार को मांस पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस कानून को पुनः 1983 में संशोधित किया गया जिसके तहत यीशु के सम्मान में गुड फ्राइडे और ईस्टर के बीच पड़ने वाले सभी शुक्रवार को मांस का निषेध करना 14 वर्ष से अधिक आयु वाले किसी भी इसाई धर्म के लोगों के लिए अनिवार्य हो गया। इस कारण इसाई धर्म के लोग इन दिनो मछली का सेवन करते है क्योंकि उनके अनुसार मछली मांस के वर्ग में नहीं आता है।

गुड फ्राइडे के इसी नियम से सम्बंधित एक बहुत ही रोचक कहानी है जिसने एक ओहायो (Ohio) में स्थित व्यापारी का बर्गर (Burger) बनाने का व्यापार और मैकडॉनल्ड्स (McDonald's) के भोजनसूची को बदल कर रख दिया। अपने हैम्बर्गर (hamburger) के लिए मशहूर मैकडॉनल्ड्स के भोजनसूची में कई और स्वादिष्ट व्यंजन है जैसे कि फिले-ओ-फिश सैंडविच (Filet-O-Fish Sandwich) जिसकी खोज अमेरिका के एक शहर, ओहायो में रहने वाले बर्गर के व्यापारी, लू ग्रोएन (Lou Groen) नें किया था। 1959 में जब लू ग्रोएन नें पहली मैकडॉनल्ड्स की फ्रैंचाइज़ी (Franchise) खोली थी तब मैकडॉनल्ड्स आज की तरह एक प्रसिद्ध ब्रांड (Brand) नहीं था और इस कारण ग्रोएन को अपने व्यापार को सही प्रकार से चलाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी थी। अपने दूकान को चलाने में ग्रोएन के बेटे, पॉल उनकी काफी मदद करते थें, पॉल नें 20 वर्ष तक अपने पिता के व्यापार में उनकी सहायता की और उसके पश्चात खुद अपनी मैकडॉनल्ड्स की फ्रैंचाइज़ी खोली। अपने शुरुआती दिनों में ग्रोएन को मैकडॉनल्ड्स से ज्यादा मुनाफा नहीं होता था, दूकान खोलने के प्रथम महीने में उन्हें मात्र $ 8,716 की कमाई हुई थी, जितना आज वह एक दिन में कमा लेते है। वही मैकडॉनल्ड्स खोलने के पहले दिन ग्रोएन को $ 307.38 की बिक्री हुई थी जो व्यापार चलाने के लिए बहुत कम था।

ग्रोएन और उनकी पत्नी अपने इस रेस्टोरेंट (Restaurant) को चलाने में वैसे ही काफी संघर्ष कर रहे थे और किसी प्रकार अपना गुज़ारा चला रहे थें, परन्तु उन्हें सबसे अधिक मुसीबत का सामना ईस्टर (Easter) के दिनों में करना पड़ा। मोनफोर्ट हाइट्स, ओहियो (Monfort Heights, Ohio), जहा ग्रोएन का रेस्टोरेंट था, वहां 87 प्रतिशत आबादी कैथोलिक (इसाई धर्म के लोग) थे और इस कारण वह ईस्टर के दिनों में मांस का सेवन नहीं करते थें जिस कारण उन दिनों ग्रोएन को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा । एक दिन उन्होंने देखा कि उनका एक प्रतियोगी अपने रेस्टोरेंट में कुछ अलग कर रहे थें - उनके पास एक मछली से बनी सैंडविच (sandwich) थी। ग्रोएन को उनकी यह तरकीब बहुत पसंद आई, ईस्टर के समय जो लोग मांस नहीं खाते है, उनके लिए मछली का सैंडविच एक अच्छा विकल्प हो सकता था। ग्रोएन नें बिना विलम्ब किये मछली का सैंडविच बनाने में लग गए, उन्होंने अपने सभी प्रतिस्पर्धियों के सैंडविच का मूल्यांकन किया और 1961 में अपने द्वारा बनायी इस मछली के सैंडविच – ‘फीलेट-ओ-फिश’ को मैकडॉनल्ड्स के मेन्यु (menu) में जोड़ने का प्रस्ताव लेकर रे क्रोक ((Ray Kroc) मैकडॉनल्ड्स के संस्थापक) के पास शिकागो (Chicago) चले गए।

1959 में मैकडॉनल्ड्स आज की तरह एक बड़ी कंपनी (company) नहीं थी इस कारण ग्रोएन को उसके संस्थापक रे क्रोक से मिलने में ज्यादा मुस्किल नहीं हुई । मैकडॉनल्ड्स के संस्थापक रे क्रोक, पहले तो ग्रोएन के इस मछली के सैंडविच के प्रस्ताव से अधिक उत्साहित नहीं हुए थें, लेकिन क्रोक की यह अस्वीकृति के पीछे उनका अपना स्वार्थ था। उसके पास खुद का एक मांस वैकल्पिक विचार था, जिसे "हूला बर्गर" (Hula Burger) कहा जाता था, यह पाव रोटी के बीच में भुने हुए अनारस और मख्खन को लगा कर बनता था। रे क्रोक नें ग्रोएन के सामने एक प्रस्ताव रखा कि गुड फ्राइडे पर, हुला बर्गर और फिले-ओ-फिश सैंडविच दोनों चुनिंदा स्थानों पर मेन्यु में दिखाई देंगे - जो भी सैंडविच सबसे अधिक बिकेगा वह जीतेगा और मैकडॉनल्ड्स के मेन्यु (menu) में उसी सैंडविच को जोड़ा जाएगा। परिणाम हैरान करने वाला था, उस गुड फ्राइडे के दिन बस 6 हूला बर्गर बिकी और कुल 350 फिले-ओ-फिश की बिक्री हुई।

1965 तक फ़िले-ओ-फ़िश, मैकडॉनल्ड्स के मेन्यु (menu) में काफी प्रसिद्ध हो गया। रे क्रोक नें अपने हूला बर्गर के विफलता का ज़िक्र अपने जीवनी – ग्राइंडिंग इट आउट: द मेकिंग ऑफ़ मैकडॉनल्ड्स (Grinding it Out: The Making of McDonald’s) में भी किया । मंगलवार, 13 फरवरी, 1962 को पहली बार फ़िले-ओ-फ़िश मैकडॉनल्ड्स के रेस्तरां में बिकी थी और इस सैंडविच नें भरपूर कमाई की थी। आज भी ग्रोएन द्वारा बनाई यह सैंडविच मैकडॉनल्ड्स में मिलती है, इतने वर्ष पश्चात भी इसकी लोकप्रियता समाप्त नहीं हुई है और यह व्यंजन मैकडॉनल्ड्स के मेन्यु में सबसे स्वादिष्ट व्यंजन में से एक है।


संदर्भ:
1. http://rediscover.archspm.org/belonging/why-dont-catholics-eat-meat-on-fridays/
2. https://bit.ly/2GvSERr


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