मुर्गकेश : एक अनोखा पुष्प

रामपुर

 05-04-2019 07:00 AM
बागवानी के पौधे (बागान)

प्रकृति ने इस ग्रह (पृथ्‍वी) को सजाने के लिए अनेक नैसर्गिक उपहार दिये हैं, जिसमें फूल विशेष स्‍थान रखते हैं। इस संसार में ना जाने कितने रंग-बिरंगे, भिन्‍न-भिन्‍न आकृति प्रकृति वाले सुगन्‍धित पुष्‍प हैं। आज हम इन्‍हीं फूलों की दुनिया से एक खूबसूरत फूल चुनकर लाए हैं, जो मुर्गे की कलगी वाली आकृति के कारण ‘मुर्गकेश’ के नाम से जाना जाता है। यह रंग-बिरंगा मखमली फूल मूलतः एशिया तथा अफ्रिका में होता है परंतु भारत में भी इसे व्‍यापक रूप में देखा जा सकता है। यह फूल जीनस सेलोसिया अमरेन्थेसी(Celosia amaranthaceae) कुल का है। इस सजावटी फूल को घर के अंदर तथा बाहर दोनों जगह लगाया जा सकता है। अंतिम वसंत का समय इसकी फसल उगाने के लिए उपयुक्‍त होता है तथा यह अंतिम शरद ऋतु तक पुष्पित रहता है, जबकि उष्णकटिबंधीय और कटिबंधीय क्षेत्रों में इसे बारह माह उगाया जा सकता है।

सेलोसिया फूल के प्रसिद्ध प्रकार इस प्रकार हैं:

1. सेलोसिया अर्जेंटीना (Celosia argentea)
यह फूल मूलतः उष्णकटिबंधीय एशिया में उगाया जाता है। यह पौधा 1 मीटर तक बढ़ता है, पत्‍ते गहरे हरे तथा मोटे होते हैं जिनमें प्रत्‍यक्ष रिब्‍स (Ribs) होती हैं। फूल चमकीले और रंगीन होते हैं तथा 6 से 8 सप्ताह तक पुष्पि‍त होते हैं।

2. सेलोसिया क्रिस्टाटा (Celosia cristata)
सेलोसिया की यह प्रजाती मुर्गकेश के नाम से जानी जाती है। चीन में इसे ‘कुआन’ कहा जाता है। यह लाल, पीले तथा सफेद रंग के होते है। पश्चिम अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में इस फूल तथा इसकी पत्तियों को एक खाद्य फसल के रूप में उपयोग किया जाता है।

3. सेलोसिया प्लुमोसा (Celosia plumosa)
फेदरी ऐमारैंथ (feathery amaranth) के नाम से जाना जाने वाला यह पौधा 40 सेमी तक बढ़ता है। इसमें आकर्षक तने, अंडाकार पत्तियों और फूलों से युक्‍त शाखाएं होती हैं। इस प्रजाति के फूलों को अक्सर सुखाने और सजावट के लिए संरक्षित किया जाता है क्योंकि इनके रंग लंबे समय तक बने रहते हैं।

4. सेलोसिया काराकस (Celosia caracas)
सेलोसिया काराकस मध्‍य गर्मी से पतझड़ तक खिलता है। इसकी पत्तियां अंडाकार तथा फूल गुलाबी और बैंगनी रंग के होते हैं।

सेलोसिया की खेती के लिए आवश्‍यक कारक :

1. तापमान
इस फूल को पर्याप्‍त तापमान (8-25°सेल्सियस) की आवश्‍यकता होती है। यदि आप इसे घर के भीतर लगाते हैं तो एक अच्‍छी उपज के लिए दक्षिणी और पश्चिमी दिशा की ओर रखें।

2. पानी
सेलोसिया के पौधे के लिए नम मिट्टी की आवश्‍यकता होती है। हालाँकि यह पौधा थोड़े समय के सूखे को सहन कर सकता है, किंतु नमी युक्‍त मृदा इसके लिए आवश्‍यक होती है। पौधे की पत्तियों को धब्‍बों, तनों और जड़ को सड़न तथा कवकीय रोगों से बचाने के लिए पानी के अनुपात का विशेष ध्‍यान रखें क्‍योंकि आवश्‍यकता से अधिक पानी भी इसके लिए हानिकारक है।

3. मिट्टी
सेलोसिया का पौधा वैसे तो कई प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है, लेकिन कार्बोनिक(carbonic) पदार्थों और शोषक क्षमता से समृ‍द्ध मिट्टी इसके लिए अधिक उपयुक्‍त होती है। आवश्यक मिट्टी का पीएच(pH) स्तर लगभग 6 से 7 होना चाहिए।

4. कीट और रोग
एफिड(aphid) और स्पाइडर माइट(spider mite) जैसे कीट और बिमारियों सेलोसिया के पौधे को संक्रमित करते हैं। बीमारियों का पता लगाने के ‍लिए, पत्तियों के धब्‍बे, तना और जड़ की नियमित जांच करते रहें। संक्रमण से बचाने के लिए अपने पौधे को स्वस्थ रखें, पानी को सीमित रखें और जल निकासी की उचित व्‍यवस्‍था रखें। यदि आवश्यक हो तो जैविक कीटनाशक और कवकनाशी का छिड़काव करें क्योकि एक बार यदि आपके सीलोसिया का पौधा मुरझाना प्रारंभ हो जाता है तो इसे पुनः विकसित करना कठिन हो जाता है।

इस फूल को बीजारोपण तथा पौधारोपण दोनों प्रक्रिया से उगाया जा सकता है। पौधारोपण से पूर्व ध्‍यान रखें मिट्टी गर्म हो, क्‍योंकि पौधों को किसी भी प्रकार की सर्दी लगने से गर्मियों में फूल ना आने का खतरा बढ़ जाता है। एक अ‍च्‍छी किस्‍म प्राप्‍त करने के लिए इसका बीजारोपण अधिक लाभदायक होगा। बीज को मिट्टी में रोपने के बाद उचित तापमान में ढककर रखें तथा समय-समय पर इसे नियमित पानी देते रहें। सही देख रेख में 10 से 15 दिनों के भीतर बीज अंकुरित हो जाते हैं तथा पौधो की परिपक्व ऊँचाई लगभग 6 से 24 इंच तथा विस्‍तार 8 से 12 इंच तक होती है।

संदर्भ :

1. https://rampur.prarang.in/post-view.php?id=1064&name=postname
2. http://blog.nurserylive.com/2016/08/23/here-is-all-you-want-to-know-about-the-wooly-cockscomb-plant-and-gardening-in-india
3. https://balconygardenweb.com/how-to-grow-celosia-growing-and-planting-guide/
4. https://www.alkarty.com/how-to-grow-cockscomb-seeds-summer.html



RECENT POST

  • जैन धर्म के दो समुदाय – दिगंबर और श्वेताम्बर
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     18-04-2019 12:05 PM


  • रोहिलखंड में कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी की भूमिका
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     17-04-2019 01:19 PM


  • रामपुर में लगी थी पहली विद्युतीय लिफ्ट (lift)
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     16-04-2019 04:23 PM


  • लोक कला का नाट्य अनुभव में परिवर्तन
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     15-04-2019 02:22 PM


  • हमारे भारत की पुरातत्व संस्कृति और शान
    द्रिश्य 1 लेंस/तस्वीर उतारना

     14-04-2019 07:20 AM


  • भगवान विष्णु के दशावतार और चार्ल्स डार्विन (Charles Darwin) के सिद्धांत के बीच समानताएं
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     13-04-2019 07:00 AM


  • जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद भारतीयों पर पड़ा था गहरा प्रभाव
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     12-04-2019 07:00 AM


  • क्या तारेक्ष और ग्लोब एक समान हैं?
    वास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली

     11-04-2019 07:05 PM


  • गर्मियों में पक्षियों के लिए करें पानी का प्रबंध
    पंछीयाँ

     10-04-2019 07:00 AM


  • राजनीति में अभिनेताओं का प्रवेश
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     09-04-2019 07:00 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.