Machine Translator

आखिर भारत में लौह उद्योग को आज किन चुनौतियों का सामना करना पर रहा है

रामपुर

 16-03-2019 09:00 AM
खदान

आधुनिक सभ्यता की रीढ़ लौह अयस्क सार्वभौमिक उपयोग की एक धातु है। साथ ही यह हमारे मूल उद्योग की नींव है और इसका उपयोग पूरे विश्व में किया जाता है। लोहे को लौह अयस्क के रूप में खननों से निकाला जाता है। तो आइए जानते हैं भारत के लौह अयस्क उद्योग और उनके सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में।

भारत द्वारा वित्त वर्ष 2018 में लगभग 210 मिलियन टन लौह अयस्क का उत्पादन किया, और इसने पिछले वर्ष से 9% की वृद्धि को दिखाया है। भारत में लौह अयस्क का संग्रह मुख्य रूप से ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और गोवा राज्यों में किया जाता है और इनमें से ओडिशा का योगदान भारत के कुल उत्पादन का लगभग 50% है। साथ ही जहाँ 50 से अधिक देशों में लौह अयस्क का उत्पादन किया जाता है, उनमें सबसे बड़े उत्पादक ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, भारत और रूस हैं। ऑस्ट्रेलिया और ब्राज़ील विश्व के लौह अयस्क उत्पादन में लगभग 60% का योगदान देते हैं। वित्त वर्ष 2018 में लौह अयस्क का भारतीय निर्यात 24.1 मिलियन टन और आयात 8.7 मिलियन टन था। वहीं वित्त वर्ष 2019 में देश में बुनियादी ढाँचे और ऑटोमोबाइल उद्योगों में स्थिर माँग के साथ लौह अयस्क का उत्पादन 2-5% बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही लौह अयस्क पेलेट का निर्यात वित्त वर्ष 2019 में लगभग 10 मिलियन टन तक पहुँचने की उम्मीद है। विभिन्न प्रकार के लौह अयस्क में शुद्ध लोहे का प्रतिशत भिन्न होता है, वहीं लौह अयस्क की चार किस्में निम्नलिखित हैं:
मैग्नेटाइट :- यह सबसे अच्छी गुणवत्ता वाला लौह अयस्क है और इसमें 72 प्रतिशत शुद्ध लोहा मिलता है। इसके चुंबकीय गुण की वजह से ही इसे मैग्नेटाइट कहा जाता है। यह आंध्र प्रदेश, झारखंड, गोवा, राजस्थान, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में पाया जाता है।
हेमाटाइट :- हेमाटाइट में 60 से 70 प्रतिशत तक शुद्ध लोहा होता है। 80 प्रतिशत हेमाटाइट आंध्र प्रदेश, झारखंड और उड़ीसा में संग्रहित हैं और ये छत्तीसगढ़, गोवा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान में भी पाए जाते हैं।
लिमोनाईट :‌‌‌- इसमें 40 फीसदी से 60 फीसदी शुद्ध आयरन होता है। यह पीले या हल्के भूरे रंग का होता है। रानीगंज कोयला क्षेत्र में दामुड़ा श्रृंखला, उत्तराखंड में गढ़वाल, उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर और हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी में पाया जाता है।
साइडराइट :- इसमें कई अशुद्धियाँ होती हैं और इसमें केवल 40 से 50 प्रतिशत शुद्ध लोहा होता है। वहीं चूने की उपस्थिति के कारण यह स्वयं पिघलने लग जाते हैं।

उपरोक्त तालिका से हम यह स्पष्ट देख सकते हैं कि लौह अयस्क का उत्पादन और इसका मूल्य प्रत्येक वर्ष नियमित रूप से बढ़ता आ रहा है। हालांकि देश के कई हिस्सों में लौह अयस्क की कुछ मात्रा पाई जाती है, लेकिन लौह अयस्क के संग्रह का प्रमुख हिस्सा कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में ही केंद्रित है। यह केवल छह राज्यों झारखंड, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और गोवा में केंद्रित है, जहाँ भारत के कुल संग्रह का 95 प्रतिशत हिस्सा पाया जाता है। इन राज्यों के अलावा कम मात्रा में लौह अयस्क का उत्पादन भी किया जाता है, जिनमें से उत्तर प्रदेश राज्य का मिर्जापुर भी शामिल है।

वहीं कई चुनौतियों ने भारत में लौह अयस्क के खनन और अन्वेषण गतिविधियों में कुल निवेश को सीमित कर दिया है। ये चुनौतियाँ इस प्रकार हैं:
कीमतों में अस्थिरता: लौह अयस्क की कीमतें अस्थिर और उतार-चढ़ाव वाली होती हैं, जो मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति पर निर्भर करती हैं। इस वजह से खनन कंपनियों के लिए अस्थिर वातावरण में काम करना मुश्किल हो जाता है।
कम सरकारी खर्च: भारत में अन्य लौह अयस्क उत्पादक देशों की तुलना में खनन क्षेत्र में सरकारी खर्च बहुत कम होता है। इस विभाग के विकास में वृद्धि के लिए जांच पड़ताल पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
खनन प्रतिबंध :- गोवा और कर्नाटक राज्यों में खनन प्रतिबंध कई कारणों, जैसे नियमों का पालन ना करने की वजह से हुआ है। जिसने बेरोजगारी और सरकार के लिए राजस्व स्रोत कम होने के साथ-साथ विभिन्न पहलुओं पर गंभीर प्रभाव डाला है। फरवरी 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने गोवा में सभी लौह अयस्क खनन पट्टों को रद्द कर दिया था।
स्थानीय लोगों का विरोध :- खनन के लिए स्थानीय लोगों से भूमि प्राप्त करना एक कठिन कार्य है। वहीं कंपनी को वन भूमि में कटाई के संबंध में, भूमि अधिग्रहण और लौह अयस्क के लिए पूर्वेक्षण लाइसेंस के लिए कई विनियामक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इससे लौह अयस्क की अपूर्ति भी प्रभावित होती है।

संदर्भ :-
1. https://bit.ly/2JcKXmn
2. https://bit.ly/2UCkcJw
3. https://bit.ly/2HxC3gW



RECENT POST

  • मानव शरीर में मौजूद हैं असंख्य लाभकारी सूक्ष्मजीव
    कीटाणु,एक कोशीय जीव,क्रोमिस्टा, व शैवाल

     18-09-2019 11:12 AM


  • उत्तर भारत की प्रसिद्ध मिठाई है खाजा
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     17-09-2019 11:12 AM


  • प्रत्येक मानव में पाई जाती है आनुवंशिक भिन्नता
    डीएनए

     16-09-2019 01:38 PM


  • कैसे किया एक इंजीनियर ने भारत में दुग्ध क्रांति (श्वेत क्रांति) का आगाज
    आधुनिक राज्य: 1947 से अब तक

     15-09-2019 02:39 PM


  • रामपुर के नज़दीक ही स्थित हैं रोहिल्ला राजाओं के प्रमुख स्थल
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     14-09-2019 10:30 AM


  • शुरुआती दिनों की विरासत हैं रामपुर स्थित फव्वारे
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     13-09-2019 01:44 PM


  • विलुप्त होने की स्थिति में है मेंढकों की कई प्रजातियाँ
    मछलियाँ व उभयचर

     12-09-2019 10:30 AM


  • सर्गेई प्रोकुडिन गोर्स्की द्वारा रंगीन तस्वीर लिए जाने का इतिहास
    द्रिश्य 1 लेंस/तस्वीर उतारना

     11-09-2019 12:17 PM


  • इस्लाम में चंद्रमा को देख मनाया जाता है मोहर्रम
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     10-09-2019 02:30 PM


  • सबका मन मोहता इंद्रधनुषी मोर पंख
    पंछीयाँ

     09-09-2019 12:32 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.