Machine Translator

महिलाओं में रक्ताल्पता

रामपुर

 08-03-2019 12:24 PM
विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

देश के विकास के लिये कई दीर्घकालिक रणनीति अपनाई जाती है लेकिन इसका आधार हमारी देश की महिलाएं होती है, इसका मतलब यह है कि अगर हमें तेज विकास करना है तो यह महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना संभव नहीं हो सकता, जो देश की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं। हाल ही में हुए सर्वे बताते हैं कि देश के कार्य बल में लैंगिक भेद-भाव लगातार बदतर होता जा रहा है। इसलिये इस बार के अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की थीम भी "बैलेंस फॉर बैटर" (Balance for Better) अर्थात बेहतर के लिए संतुलन रखी गई है। इस साल इस थीम का उद्देश्य नई सोच के साथ लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।

परंतु देश की सामाजिक हकीकत को देखें तो महिलाओं को जीवन की शुरुआत से ही हर बात में पीछे रखा जाता हैं। चाहे वह पोषण की उपलब्धता हो या फिर स्वास्थ्य और साफ-सफाई की सुविधाएं हों या फिर शिक्षा हो, महिलाओं को बराबर अवसर नहीं मिलता और वे भेद-भाव का शिकार होती हैं। ऐसे में भारत में रक्ताल्पता का व्यापक प्रभाव एक गंभीर मसला है। देश के स्वास्थ्य संबंधी स्थिति के आकलन के लिए सबसे बड़ा स्रोत राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) है और इसकी ताजा रिपोर्ट दिखाती है कि देश में लगभग 50% प्रतिशत महिलाएं रक्ताल्पता से पीड़ित है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानदंडों के अनुसार, यदि पुरुषों में हीमोग्लोबिन स्तर प्रति डेसिलिटर (डीएल) पर 13.0 ग्राम (जी) से कम है तो उन्हें रक्ताल्पता से ग्रसित माना जाता है। यदि महिलाओं में 12.0 जी/डीएल से स्तर कम है और वे गर्भवती नहीं हैं तो वे रक्ताल्पता से ग्रसित हैं। गर्भवती महिलाओं में, 11.0 ग्रा/डीएल से कम स्तर रक्ताल्पता का संकेत देते हैं, तथा यदि 0.5-5.0 वर्ष के बच्चों में ये स्तर 11.0 जी/डीएल, 5-12 वर्ष के बच्चों में 11.5 जी/डीएल और किशोरों (12-15 वर्ष) में 12.0 जी/डीएल है तो वे रक्ताल्पता से ग्रसित माना जाता है। यदि रामपुर की ही बात करे तो यहां पर 58.0 से 58.5 प्रतिशत महिलाएं (15-49 वर्ष) जो गर्भवती नहीं हैं, रक्ताल्पता से ग्रसित है। 62.3 से 61.5 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं (15-49 वर्ष) रक्ताल्पता से ग्रसित है तथा 17.3 से 21.1 प्रतिशत पुरुष (15-49 वर्ष) रक्ताल्पता से ग्रसित है।

अगस्त 2018 में मेडिकल जर्नल बीएमजे ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित एक अध्ययन में ये बात बताई गई है कि महिलाओं की शिक्षा में सुधार, पोषण और स्वास्थ्य उपायों के अलावा भारत के रक्ताल्पता के बोझ को कम करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण हस्तक्षेप हो सकता है। अध्ययन के लिए, वाशिंगटन स्थित अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (IFPRI) के गरीबी, स्वास्थ्य और पोषण विभाग के शोधकर्ताओं ने भारत के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों के दो आंकडों (2005-06 और 2015-16) की तुलना की तथा छह से 24 महीने के बच्चों और 15 से 49 साल की गर्भवती और गैर-गर्भवती महिलाओं में रक्ताल्पता की प्रवृत्ति की जांच की है। अध्ययन से पता चला कि गर्भावस्था में रक्ताल्पता को कम करने के लिए एक महिला की शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण कारक साबित हुई है। वहीं बच्चों के मामले में, आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां और पूर्ण टीकाकरण और विटामिन ए पूरकता जैसे उपाय कारगर साबित हुए।

NFHS के अनुसार, वर्ष 2016 में रक्ताल्पता भारत में व्यापक थी, इससे 58.6 फीसदी बच्चे, 53.2 फीसदी गैर-गर्भवती महिलाएं और 50.4 फीसदी गर्भवती महिलाएं ग्रसित थी। गर्भावस्था के दौरान रक्ताल्पता से मृत्यु का खतरा दोगुना हो जाता है और बच्चों में खराब मानसिक विकास होता है। इस अध्ययन से पता चलता है की, यह वयस्कों में उत्पादकता क्षमता कम कर सकता है और इससे सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 4 फीसदी का नुकसान हो सकता है। इसका मतलब लगभग 7.8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान है, जो कि 2018-19 में स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा के लिए भारत के बजट का पांच गुना है। रक्ताल्पता के प्रभाव सबसे ज्यादा बच्चों और गर्भवती महिलाओं में देखे गये है।

बच्चों और वयस्कों में रक्ताल्पता का प्रसार – 2005-06 और 2015-16
उपरोक्त आंकड़ो मे आप देख सकते है की 2005-06 से 2015-16 तक बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं में रक्ताल्पता के स्तर में बदलाव आया है। अध्ययन से पता चलता है कि इस बदलाव में महिलाओं की स्कूली शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य हस्तक्षेप, मातृ विद्यालय में सुधार, स्वच्छता सुधार, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की संख्या, कम शरीर द्रव्यमान सूचकांक, मांस और मछली की खपत में सुधार तथा स्वच्छता की सुविधाओं में सुधार आदि कारकों का योगदान शामिल है।

रक्ताल्पता कम करने में कारकों का योगदान, 2005-06 और 2015-16
उपरोक्त आंकड़ो से आप देख सकते है की महिलाओं में, गर्भावस्था में रक्ताल्पता को कम करने के लिए उनकी शिक्षा में सुधार सबसे महत्वपूर्ण कारक साबित हुआ है।

संदर्भ:
1. https://bit.ly/2Hg8Y9D
2. http://rchiips.org/nfhs/FCTS/UP/UP_Factsheet_136_Rampur.pdf
3. https://en.wikipedia.org/wiki/Anemia



RECENT POST

  • भारत के अनाथालयों में बच्चों की बढ़ती संख्या एक गंभीर मुद्दा
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     26-06-2019 12:40 PM


  • क्या है बीटलविंग कला
    तितलियाँ व कीड़े

     25-06-2019 11:30 AM


  • विश्‍व में आठवां सबसे बड़ा नियोक्‍ता भारतीय रेलवे
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     24-06-2019 11:59 AM


  • क्रिकेट विश्व कप में भारत के कुछ यादगार लम्हे
    हथियार व खिलौने

     23-06-2019 09:15 AM


  • रामपुर की जामा मस्जिद एवं भारत की विभिन्‍न मस्जिदों में सौर घडि़यों की भूमिका
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     22-06-2019 11:45 AM


  • योग का एक अनोखा रूप - कुंडलिनी योग
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     21-06-2019 10:40 AM


  • रुडयार्ड किपलिंग की कविता में रोहिल्ला युद्ध का वर्णन
    ध्वनि 2- भाषायें

     20-06-2019 11:36 AM


  • टी-शर्ट का इतिहास
    स्पर्शः रचना व कपड़े

     19-06-2019 11:15 AM


  • पाकिस्‍तान में अभी भी जीवित हस्‍त कशीदाकारी
    स्पर्शः रचना व कपड़े

     18-06-2019 11:10 AM


  • क्‍या है लाल मांस और सफेद मांस के मध्‍य भेद?
    शारीरिक

     17-06-2019 11:13 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.