क्यों होती है गुदगुदी?

रामपुर

 22-02-2019 12:17 PM
स्पर्शः रचना व कपड़े

शरीर के किसी भाग को छूने की क्रिया जिसके कारण शरीर में एक प्रकार की हलचल होती है, जो कि हसीं का कारण बनतीं हैं, उसे गुदगुदी कहते हैं। गुदगुदी त्वचा पर किसी हल्की उत्तेजना के परिणामस्वरूप होती है। गुदगुदी में मुस्कुराहट, हँसी, और रोंगटे खड़े हो जाना इत्यादि लक्षण शामिल हैं।

गुदगुदी की संवेदना को दो अलग अलग भागों मे बांटा जा सकता है, एक में त्वचा को हल्का सा छूने से सनसनी होती है जैसे कोई कीट के चलने से और दूसरे में गहरे दबाव के साथ त्वचा को छूने से सुखद, हसीं की भावना उत्तेजित होती है।

सामान्य तौर पर देखें तो इंसान को ऐसे जगहों पर गुदगुदी अधिक होती है जो कम हड्डीयों से घिरा होता है जैसे पेट, पैर के तलवे, बगल, धड़ के किनारे, गर्दन, नाभि आदि।

आखिर क्या है गुदगुदी के पीछे का विज्ञान(science)?
कई लोगों के लिए गुदगुदी असहनीय है, फिर भी वे गुदगुदी किये जाने पर हसते हैं जिसका कारण होता है मस्तिष्क में होने वालीं भावनात्मक प्रतिक्रियाएं। वैज्ञानिकों के अनुसार हमारा मस्तिष्क हमारी भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को उत्तेजित करता है। जब हमें गुदगुदी होती है तब हमारे मस्तिष्क में उत्पन्न प्रतिक्रियाओं के कारण हसीं के साथ साथ एक दर्द भी उत्पन्न होता है। समय -समय पर किये गये अनुसंधानो से पता चलता है कि हमारी दर्द और स्पर्श तंत्रिका गुदगुदी के दौरान साथ साथ हलचल करती हैं।

क्या इंसान खुद को गुदगुदी कर सकता है?
यह एक सामान्य सवाल है जो अक्सर लोगों के दिमाग में आता है ,हम दूसरों को गुदगुदी करने के अलावा अपने ऊपर भी ऐसा करने का प्रयास करते हैं, पर हमें गुदगुदी का एहसास नहीं होता जिसका कारण है हमारी मानसिक गतिविधियां। हम जो भी करने का प्रयास करते हैं हमारा मस्तिष्क उस क्रिया को पहले से ही जान जाता है , इसलिए जब हम खुद को गुदगुदी करते हैं, तो हमारा मस्तिष्क पहले ही उस प्रतिक्रिया के लिए तैयार होता है और हमें गुदगुदी का एहसास नहीं होता।

अगर आप इसके बावजूद खुद को गुदगुदाने की कोशिश करेंगे तो गुदगुदी के बजाय कुछ और ही होगा. हालांकि अपने ही हाथों में किसी पंख को लेकर अपनी त्वचा पर फिराने से आप खुद को गुदगुदी कर सकते हैं. मगर ऐसा मुश्किल से ही होता है कि आप हंसते-हंसते लोटपोट हो जाएं।

छोटे बच्चों में गुदगुदी की उम्र
छोटे बच्चे पैदा होने के 4 महीने तक हँसना शुरू नहीं करते, इसलिए छोटा बच्चा 6 महीने तक गुदगुदी करने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं करता। 6 महीने का बच्चा स्पर्श को पहचानने लगता है। गुदगुदी का खेल माता पिता और बच्चे के बीच आम है, बच्चे के साथ भावनात्मक संबंध को प्रोत्साहित करने के लिए माता पिता बच्चे को हँसाते है जिसको वो महसूस करता है। एक बच्चा गुदगुदी की गंभीरता को बड़े होकर ही समझता है, जब उसके मस्तिष्क से उसे संकेत मिलता है।

क्यों कुछ लोगों को बाकी लोगों के मुक़ाबले ज्यादा गुदगुदी होती है?
यह सच है कि कुछ कुछ लोगों को अधिक गुदगुदी होती है,पर ऐसा होना स्वभाविक है क्योंकि कई लोगों का शरीर अधिक संवेदनशील होता है, जिसके कारण उन्हे हल्का सा छूने पर भी अधिक गुदगुदी का एहसास होता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जवान लोगों में 40 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों के मुक़ाबले अधिक संवेदनशीलता होती है, परन्तु वह अभी अपने इस तर्क (‘’कुछ लोगों को बाकी लोगों के मुक़ाबले अधिक गुदगुदी होती है’’) से पूर्ण तरह सहमत नहीं है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि गुदगुदी की भावना हमारे बचपन में विकास के साथ जुड़ी हुई है । इस वजह से, यह संभव है एक व्यक्ति के गुदगुदी करने से सकारात्मक प्रतिक्रिया हो और दूसरे व्यक्ति में गुदगुदी करने से नकारात्मक प्रतिक्रिया।

आप गुदगुदी का मुकाबला कैसे कर सकते हैं?

हंसी मज़े के साथ जुड़ी हुई है, पर गुदगुदी के मामले में ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ लोग गुदगुदी को एक हसीं का माध्यम समझते हैं, पर कुछ लोगों के लिए गुदगुदी कोई हसीं की बात नहीं है।

यह सत्य है कि गुदगुदी हमारे शरीर की स्पर्श भावना और बाकी की इंद्रियों को भी प्रभावित करती है और उनमें उत्तेजना पैदा करतीं है, साथ ही यह हमारे मस्तिष्क की नाड़ियों को भी क्रियात्मक बनाती है। हमें हमेशा पैरों के तलवे, बगल, पेट इत्यादि में ज्यादा गुदगुदी होती है जोकि हंसी का कारण बनतीं हैं पर हम इसे रोकने के लिए क्या कर सकते हैं ताकि हमें गुदगुदी का एहसास न हो ? तो आइये जानते हैं, क्या आपने कभी किसी क्रोधी इंसान को गुदगुदी करने की कोशिश की है, यदि हाँ तो आपने ध्यान दिया होगा की उन्हें गुदगुदी का एहसास नहीं होता, जिसका कारण होता है मस्तिष्क में होने वाली प्रतिक्रिया। अगर आप अपने आपको गुदगुदी से बचाना चाहते है तो जब कभी कोई आपको गुदगुदी करने का प्रयास करे तो अपनी आंखे बंद करके किसी ऐसी वस्तु के बारे में सोचिए जो की कम संवेदनशील हो, और अपने मस्तिष्क को यह संदेश दें कि आपको गुदगुदी नहीं होती, क्योंकि जो आप सोचते हैं आपका मस्तिष्क उसी पर प्रतिक्रिया करता है।

संदर्भ:-
1. https://www.healthline.com/health/why-are-people-ticklish
2. https://en.wikipedia.org/wiki/Tickling
3. https://lifehacker.com/why-we-are-ticklish-and-how-to-overcome-it-1679545254
4. https://bit.ly/2GD0QjX



RECENT POST

  • 111
    स्पर्शः रचना व कपड़े

     19-03-2019 07:00 AM


  • इस्लामी वास्तुकला में रंगों का महत्व
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     18-03-2019 07:45 AM


  • तितलियों का कायांतरण - आखिर कैसे बड़ी होती है तितलियां
    तितलियाँ व कीड़े

     17-03-2019 09:00 AM


  • आखिर भारत में लौह उद्योग को आज किन चुनौतियों का सामना करना पर रहा है
    खदान

     16-03-2019 09:00 AM


  • क्या होता है जंक डीएनए?
    डीएनए

     15-03-2019 09:00 AM


  • रामपुर की एक महिला ने किया था ख़िलाफ़त आन्दोलन में गाँधी जी का सहयोग
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     14-03-2019 09:00 AM


  • घौंसले में रहने वाली चींटी
    तितलियाँ व कीड़े

     13-03-2019 09:00 AM


  • गणितीय पहाड़ों का उदगमन
    धर्म का उदयः 600 ईसापूर्व से 300 ईस्वी तक

     12-03-2019 09:00 AM


  • वन संरक्षण की एक मुहिम चिपको आंदोलन
    आधुनिक राज्य: 1947 से अब तक

     11-03-2019 12:41 PM


  • रोज़ के भाग दौर भरी जिंदगी में फसा एक युवक
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     10-03-2019 12:39 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    रोज़ के भाग दौर भरी जिंदगी में फसा एक युवक | Routine