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वृद्धावस्‍था को सुखदायी बनाने के लिए आवश्‍यक है सेवानिवृत्ति योजना

रामपुर

 24-01-2019 01:27 PM
सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

वृद्धावस्‍था जीवन का वह पड़ाव होता है, जब व्‍यक्ति के शरीर की कार्य क्षमता कम होने लगती है और धीरे-धीरे वह दूसरों पर निर्भर होना प्रारंभ हो जाता है। समय के साथ-साथ परिवार के सदस्‍य ही कई बार उन्‍हें सदस्‍य के स्‍थान पर एक बोझ समझने लगते हैं। कोई आपको बोझ समझे इससे पहले अच्‍छा होगा कि आप अपने कार्यकारी जीवन काल के दौरान ही अच्छी सेवानिवृत्ति योजना बना लें, जिससे आपको वृद्धावस्‍था में किसी के आगे झुकना ना पड़े और आप अपनी युवावस्‍था की भांति ही इस अवस्‍था का भी आनंद उठा सकें। इसके लिए सर्वप्रमुख है, वृद्धावस्‍था में आपकी वित्तीय स्थिति का मज़बूत होना।

भारत में बढ़ती आबादी के सा‍थ काम न करने वाले बुजुर्गों की संख्‍या भी बढ़ती जा रही है। इसके अलावा, जैसे-जैसे भारतियों की जीवन प्रत्याशा बढ़ रही है, सेवानिवृत्ति के वर्षों की संख्या में भी वृद्धि होने की आशा लगायी जा रही है, जिसमें आप इतना धन एकत्रित कर लें कि अपनी सेवानिवृत्ति के बाद का जीवन आसानी से व्यतीत कर सकें। आज के समय में स्वास्थ्य देखभाल और अन्य आवश्यक चीजों के लिए बढ़ती लागत का अर्थ है कि आपको अपनी भावी योजना के लिए उचित और योजनाबद्ध निवेश की आवश्‍यकता होगी। किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए एक सुनियोजित योजना की आवश्‍यकता होती है, इसी प्रकार एक व्‍यवस्थित सेवानिवृत्ति योजना भी आपकी वृद्धावस्‍था को जीवन का सर्वश्रेष्ठ समय बना सकती है, जिसमें आपको ना बच्‍चों की जिम्‍मेदारी की और ना ही किसी विशेष प्रकार के कर्ज की चिंता होगी। सेवानिवृत्ति की योजना मनोवांछित जीवन शैली जीने तथा वृद्धावस्‍था में आने वाली अवांछनीय घटनाओं से निपटने में मदद करती है।

जीवन में विभिन्न प्रकार की आवश्यकताएं और कार्य होते हैं, जिनमें से कुछ नीचे सूचीबद्ध हैं:

1. घर खरीदना
2. नौकरी बदलना
3. पितृत्व
4. बच्चों की शिक्षा
5. बच्चों का विवाह
6. सेवानिवृत्ति निकाय
7. बीमा
8. कर योजना

सेवानिवृत्ति योजना एक कला नहीं वरन् एक निश्चित विज्ञान है जिसमें एक योजना को तैयार करने के लिए एक व्‍यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता होती है। इसके चरणबद्ध दृष्टिकोण कुछ इस प्रकार हैं:

चरण 1: अपने वित्तीय और सेवानिवृत्ति लक्ष्यों की पहचान करना
चरण 2: अपनी वर्तमान वित्तीय स्थिति का विश्लेषण करना
चरण 3: जोखिम रूपरेखा तैयार करना
चरण 4: संपत्ति आवंटन
चरण 5: निवेश आवंटन रणनीति
चरण 6: आवधिक निगरानी और संतुलन करना

विशेषज्ञ / पेशेवर की सलाह लेना और अपनी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपने जीवन के विभिन्न चरणों के आधार पर एक व्यापक ढांचा बनाना आवश्यक है।

सेवानिवृत्ति योजना के कुछ सिद्धांत इस प्रकार हैं:

1. जब आप काम कर रहे होते हैं, तो आप किसी भी आपात स्थिति में आवश्‍यक उधार या अन्‍य किसी माध्‍यम से आवश्‍यक धन एकत्रित कर सकते हैं, किंतु सेवानिवृत्त होने के बाद आप गैर-आय उत्पादक व्यक्ति बन जाते हैं, इसलिए कोई भी आपको पैसा उधार देने के लिए तैयार नहीं होता है, न ही बैंक और न ही मित्र। सेवानिवृत्ति के बाद ऐसी आपातकालीन स्थितियों के निवारण के लिए आपको आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता है। जिसमें आपको चिकित्सा व्यय, आकस्मिक खर्चों आदि को ध्‍यान में रखते हुए न्यूनतम 6 महीने के खर्चों की व्‍यवस्‍था को आपातकालीन निधि के रूप में रखना चाहिए।

चिकित्सा उन्नति + बेहतर जीवन शैली => दीर्घायु => सेवानिवृत्त जीवन में वृद्धि => उच्च सेवानिवृत्ति कोष

2. सेवानिवृत्ति योजना की रणनीति बनाते समय ध्‍यान दें कि आप कभी भी किसी भी आकास्मिक स्थिति (निरंतर अस्‍वस्‍थता, नौकरी खो देना, परिवार के किसी बीमार या बुजुर्ग सदस्य की देखभाल करने के लिए आदि) के कारण सेवानिवृत्त हो सकते हैं, जिसके बाद भी आपको कई आपात स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

3. मुद्रास्फीति / इन्फ्लेशन (Inflation), श्रमिक वर्ग की व्यक्तिगत वित्त आवश्यकताओं को प्रभावित करती है, लेकिन वेतन वृद्धि उन्हें एक निश्चित सीमा तक हल करने में मदद कर सकती है। हालांकि, आपको मुद्रास्फीति के प्रभाव को कम करने के लिए अधिक बचत करनी होगी। ऐसे तरीके में निवेश करना होगा जो आपको अतिरिक्त लाभ दे सकते हैं। यह मुद्रास्फीति आपके रिटायरमेंट के बाद भी रहेगी। सेवानिवृत्ति के बाद की योजना बनाते समय इसका भी ध्‍यान दिया जाना चाहिए।

4. आप पर आश्रित व्‍यक्ति या आपके जीवन साथी को अपनी सेवानिवृत्ति के बाद भी एक अच्‍छी वित्‍तीय सुरक्षा प्रदान करना भी आपका कर्तव्‍य है। अतः अपनी सेवानिवृत्ति योजना बनाते समय इस तथ्‍य का भी विशेष ध्‍यान रखें। इसके लिए आप अंदाजा लगाइए कि आपके आश्रित कितने साल तक आपके साथ और आपके बाद रहने वाले हैं, उसी के अनुसार उनके लिए भावी योजना बनाएं।

5. सेवानिवृत्ति के बाद आय के विभिन्न स्रोतों से अपेक्षित आय की एक सूची बनाएं। आय की अवधि को ध्यान में रखें (मासिक / त्रैमासिक / वार्षिक / संचयी)। इन आय स्‍त्रोतों के लिए कर के निहितार्थ को समझें। इन योजनाओं से लोन (Loan) लेने की क्षमता या ‍विकल्‍प को देखें।

आजकल आपको विभिन्‍न सार्वजनिक और निजी बीमा कंपनियों द्वारा अनेक सेवानिवृत्तिय योजना देखने को मिल जाती हैं किंतु इनमें से सभी लाभदायक हों यह आवश्‍यक नहीं। इसके लिए आपको इन्‍हें गहनता से समझना अत्‍यंत आवश्‍यक है:

1. सेवानिवृत्ति के लिए अपनी आय का 10% बचाएं
2. आय में वृद्धि के साथ निवेश बढ़ाएं
3. सेवानिवृत्‍त होने से पहले अपने बचत कोष में प्रवेश न करें
4. बच्‍चों की शिक्षा तथा अन्‍य आवश्‍कताओं को पूरा करते समय अपनी सेवानिवृत्ति योजना का भी ध्‍यान रखें।
5. सेवानिवृत्ति के बाद के खर्चों का अंदाज़ा लगायें और अपने वार्षिक खर्चों का 20 गुना बचाएं तथा एक स्वास्थ्य बीमा कवर खरीदें जो आपके 70-75 वर्ष की आयु तक चले। आयु वृद्धि के साथ स्‍वास्‍थ्‍य में ‍गिरावट आना भी प्रारंभ हो जाता है तथा आगे चलकर स्‍वास्‍थ्‍य बीमा खरीदना भी मुश्किल हो जाता है।

संदर्भ:

1.https://www.principalretirementindia.com/learning-centre/retirement-planning.aspx
2.https://www.holisticinvestment.in/10-dos-of-retirement-planning/
3.https://timesofindia.indiatimes.com/business/india-business/7-Golden-rules-of-retirement/articleshow/10811264.cms



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