व्‍यवयास के प्रमुख स्‍त्रोत के रूप में मत्‍स्‍य पालन

रामपुर

 01-09-2018 02:07 PM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

जनसंख्‍या की दृष्टि से भारत का विश्‍व में दूसरा स्‍थान है, जिसमें से लगभग 60 से 65 प्रतिशत जनसंख्‍या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है तथा वे कृषि और पशुपालन के माध्‍यम से जीवन यापन करते हैं। पशु पालन (जलीय, थलीय आदि) भारत के प्रमुख व्‍यवसायों में से एक है। चलो जाने जलीय पशुपालन में मछली और बत्‍तख के पालन के विषय में।

कुछ अध्‍ययनों से ज्ञात हुआ है कि गर्म जलवायु में रहने वाले लोगों के लिए लाल मांस (यानी बकरी, भैंस आदि) स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक नहीं है। जबकि मछली खाने से हमारे शरीर में आवश्‍यक पोषक तत्‍वों (जल,कैल्शियम, पोटैशियम, फास्फोरस, लोहा, सल्फर, मैग्नीशियम, तांबा) की आपूर्ति होती है तथा यह जीवन का प्रतीक मानी जाती है।

भारतीय मछली एक्ट 1897 के तहत भारत सरकार द्वारा मछलियों को संरक्षण प्रदान किया गया है, जो उत्‍तर प्रदेश में 1948 में लागू किया गया। गंगा नदी का बेसिन होने के कारण उत्‍तर प्रदेश मत्‍स्‍य पालन की दृष्टि से काफी समृद्ध राज्‍य है। आज मत्‍स्‍य पालन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा विभिन्‍न कदम उठाए जा रहे हैं। विभिन्‍न राज्‍यों में मत्‍स्‍य विभाग की स्‍थापना की जा रही है जो किसानों और अन्‍य लोगों को उपलब्‍ध जल संसाधनों के माध्‍यम से मछली उत्‍पादकता बढ़ाने, रोजगार के अवसर, लोगों को पोषण युक्‍त खाद्य पदार्थ प्राप्‍त करने तथा मछुआ समुदाय का सामाजिक और आर्थिक विकास हेतु जागरूक करते हैं।

भारत में उपस्थित मत्‍स्‍यपालन की बड़ी झीलों में से एक किच्‍छा और रूद्रपूर क्षेत्र (उत्‍तराखण्‍ड का हिस्‍सा हैं, उत्‍तर प्रदेश का नहीं) में हैं, यह क्षेत्र रामपुर के निकट स्थित है तथा रामपुर और बरेली के कुछ किसानों द्वारा अपने खेतों में व्‍यवसाय हेतु मत्‍स्‍य पालन प्रारंभ कर अपनी आय में वृ‍द्ध‍ि की है, जिसमें यूपी सरकार के मत्‍स्‍य पालन विभाग और वैश्विक एफएओ (खाद्य और कृषि संगठन) दोनों द्वारा इन्‍हें बढ़ावा दिया जा रहा है।


कम लागत तथा कम श्रम में अधिक उत्‍पादन करने वाले व्यवसायों में से एक बत्‍तख (कुटकुट पालन) जल को स्‍वच्‍छ करते हैं और साथ ही इनके द्वारा त्‍यागे गये अपशिष्‍ट जलीय पौधों के लिए उर्वरक की भूमिका निभाते हैं, जो जलीय जन्‍तुओं के विकास में सहायक होते हैं तथा ये मांस और अंडों की आपूर्ति की दृष्टि से महत्‍वपूर्ण पक्षी सिद्ध हो रहें हैं। इनके पालन को बढ़ावा देने हेतु भी सरकार द्वारा विशिष्‍ट कदम उठाए जा रहे हैं। अंततः सरकार द्वारा उठाए गये कदम तथा आम व्‍यक्ति की जागरूकता से इन व्‍यवसायों को बढ़ावा दिया जा सकता है। इन जीवों के संरक्षण के साथ इनकी उत्‍पादकता को बढ़ाया जाए।

संन्दर्भ:
1. http://www.fao.org/docrep/005/Y1187E/y1187e14.htm
2. http://fisheries.up.nic.in/



RECENT POST

  • विज्ञान की एक नयी शाखा, समुद्र विज्ञान
    समुद्र

     11-12-2018 01:00 PM


  • मशरूम बीजहीन होने के बाद भी नए पौधे कैसे बनाते हैं?
    फंफूद, कुकुरमुत्ता

     10-12-2018 02:46 PM


  • मानव की उड़ान का लम्बा मगर हैरतंगेज़ सफ़र
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     09-12-2018 10:00 AM


  • कैसे शुरु हुई ये सर्दियों की मिठास, चिक्की
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     08-12-2018 12:08 PM


  • सुगंधों के अनुभव की विशेष प्रक्रिया
    गंध- ख़ुशबू व इत्र

     07-12-2018 12:32 PM


  • व्हिस्की का उद्भव तथा भारत में इसका आगमन
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     06-12-2018 12:54 PM


  • रोहिल्लाओं का द्वितीय युद्ध जिसमें हज़ारों सैनिकों ने गँवाई जान
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     05-12-2018 11:12 AM


  • रज़ा लाइब्रेरी में मौजूद लखनऊ के ला मार्टिनियर से मिलती जुलती कला
    घर- आन्तरिक साज सज्जा, कुर्सियाँ तथा दरियाँ

     04-12-2018 01:19 PM


  • ज्यामिति और खगोल विज्ञान का एक स्‍वरूप वैदिक कालीन वेदियां
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     03-12-2018 05:25 PM


  • पशुओं और मानवों में कुछ समानताएं
    व्यवहारिक

     02-12-2018 11:45 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.