क्यों हाथी अपने कान हिलाकर बेचैन रहता है?

रामपुर

 23-08-2018 01:55 PM
शारीरिक

हाथी ज़मीन में रहने वाला एक विशालकाय प्राणी है, जिसे हम गजराज के नाम से भी जानते हैं। हाथी सबसे बुध्दिमान जीव माना जाता है, हम सभी ने कहीं ना कहीं उन्हें काम और प्रदर्शन करते हुए देखा होगा। भारत में आमतौर पर भारी सामान उठाने के लिए उनका उपयोग किया जाता है। जब भी आपने हाथी को देखा होगा तो यह गौर किया होगा कि वह दिन भर अपने कान को हिलाता रहता है, क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों? आपको बताते हैं हाथी अपने कान से शरीर के तापमान को कम करने के लिए उसे हिलाते हैं, उनके कान उनके शरीर, विशेष रुप से सिर के लिए पंखे का काम करते हैं।

अपको पता है मनुष्‍यों की भांति हाथी के सारे शरीर में पसीने की ग्रंथि नहीं होती हैं, उनका पसीना सिर्फ़ नाखुनों से निकलता है। लेकिन उन्हें ज्यादा पसीना नहीं आता, क्योंकि उन्हें अपनी त्वचा को नम रखने के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है। अब आपके मन में ये सावाल उठ रहा होगा कि वे अपने शरीर को ठंडा कैसे रखते हैं? सौभाग्य से, हाथी को एक अंतर्निहित समाधान प्राप्त हैं: बड़े लटके हुए कान। उनके कान के अंदर छोटी रक्त वाहिकाओं का एक जाल है, जो की काफ़ी पतली हैं और रक्त वाहिकाएं सतह के बहुत करीब होने की वजह से शरीर की गरमी को बहार निकालने में मदद करती हैं, साथ ही हवा और पानी के संपर्क में आकर उसके शरीर को ठंडा महसूस कराती हैं। इसी कारण से अफ्रीकी हाथियों के कान छह फीट लंबे और चार फीट चौड़े होते हैं, क्योंकि वहां बहूत गरमी होती है। वहीं एशियाई हाथी छायादार जंगलों में रहते हैं तो उनके पास अफ्रीकी हाथियों की तुलना में छोटे कान होते हैं।

वहीं हाथी अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए गीली मिट्टी का भी उपयोग करते हैं, यह उसके शरीर को एक शीतलन प्रभाव प्रदान करता है और अक्सर वे मिट्टी के स्नान से पहले साफ़ पानी में स्नान करते हैं। ये मिट्टी का उपयोग ना केवल ठंडक पाने के लिए करते हैं, बल्कि अपने शरीर को सूर्य के ताप से बचाने और कीड़ों के काटने से राहत पाने के लिए भी करते हैं।

हाथी पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हाथी एक अद्भुत प्राणी है, लेकिन वे अभी भी रहस्य (जैसे उनकी बुद्धि और व्यवहार से लेकर उनकी सबसे बुनियादी जीव विज्ञान तक) से भरे हुए हैं। क्योंकि हाथियों की आबादी में गिरावट जारी है, हम इनके रहस्यों तक पहुंचने में असमर्थ होते जा रहे हैं। ऊपर प्रस्तुत किया गया चित्र रामपुर में एक समय पर मौजूद हाथीखाने का है। यदि आप इस हाथीखाने के बारे में अधिक जानकारी पाना चाहते हैं तो इस लिंक पर क्लिक करें- http://rampur.prarang.in/180225973

संदर्भ :-
1. https://www.quora.com/Why-do-elephants-flap-their-ears
2. https://elephantconservation.org/elephants/just-for-kids/
3. https://wonderopolis.org/wonder/why-do-elephants-have-big-ears-2
4. http://thinkelephants.blogspot.com/2014/03/dont-sweat-it-how-elephants-beat-heat_17.html



RECENT POST

  • भारत में क्रिकेट की तुलना में इतना लोकप्रिया नहीं है फुटबॉल
    हथियार व खिलौने

     29-09-2020 03:18 AM


  • पारंपरिक और नाभिकीय हथियारों का फर्क
    हथियार व खिलौने

     28-09-2020 09:58 AM


  • फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     27-09-2020 06:51 AM


  • स्वर्ण अनुपात- संख्याओं और आकृतियों का सुन्दर समन्वय
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     26-09-2020 04:34 AM


  • वाइन और धर्म के बीच संबंध
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     25-09-2020 03:23 AM


  • बरेच जनजाति और रोहिल्ला कनेक्शन
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     24-09-2020 04:00 AM


  • भारत में तुर्कों का मुगलों से लेकर वर्तमान की राजनीति पर एक उल्लेखनीय प्रभाव
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     23-09-2020 03:25 AM


  • ‘इंडो-सरसेनिक (Indo-Saracenic)’ वस्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, रामपुर स्थित रंग महल
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     22-09-2020 11:27 AM


  • सबसे पुराने ज्ञात कला रूपों में से एक हैं मिट्टी के बर्तन
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     21-09-2020 04:05 AM


  • बादामी गुफाएं और उनका गहराई
    खदान

     20-09-2020 09:32 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id