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भारत में फुटबॉल का इतिहास एवं वर्तमान स्थिति

रामपुर

 27-06-2018 01:51 PM
हथियार व खिलौने

यह स्वतंत्रता के कुछ महिनों बाद था जब भारतीय फुटबॉल (Football) टीम ने 1948 के लंदन ओलंपिक में फ्रांस के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन किया था, जो एक अच्छी मुठभेड़ में 1-2 से हारा गया था। ब्राजील में 1950 के विश्व कप में भाग लेने के लिए भारतीय टीम को आमंत्रित किया गया था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि भारतीय 40,000 हजार रूपये का प्रबंध करने में सक्षम नहीं थे। जिस कारण टीम को दक्षिण अमेरिका नहीं भेजा जा सका।

फुटबॉल की शुरूवात ब्राजील और भारत दोनों में 19वीं शताब्दी के अंत और 20वीं शताब्दी की शुरूवात में एक मध्यम वर्गीय खेल के रूप में हुई थी। यह 1920 और 1930 के दशक का समय था, जब ब्राजील के फुटबॉल ने उसकी काया ही पलट कर रख दी और यह एक श्रमिक वर्ग का खेल बन गया। भारतीय फुटबॉल के इतिहास से पता चलता है कि यही बात उसी समय पर कोलकाता में भी घटित हुयी थी। यूरोप के विपरीत, जहां पर फुटबॉल एक लाभप्रद उद्योग है और शैक्षिक संस्थाएं प्रतिभा के पोषण की देखरेख करती हैं, ब्राजील और कोलकाता दोनों की आर्थिक स्थितियों को देखते हुए, इस तरह के बुनियादी ढांचे की कल्पना करना भी असम्भव था।

अंत में, 1982 के विश्वकप के लाइव प्रसारण ने भी अपने हिस्से का खेल खेला। 1982 का विश्वकप भारत में टेलीविज़न पर पहला लाइव खेल आयोजन था।

हमें लगता है कि भारतीय फुटबॉल काफी लम्बा सफर तय कर चुका है। लेकिन यदि थोड़ी दूरी से इसका गहरा अध्ययन किया जाए तो पता चलता है कि ये पूर्ण रूप से सच नहीं है। 1956 के ओलंपिक में मेलबर्न में एक बहुत अच्छे प्रदर्शन से लेकर 1962 में एशियाई खेलों के स्वर्ण जीतने तक भारत अभी भी विश्वभर में प्रासंगिक है, विशेष रूप से एशियन फुटबॉल परिदृश्य में।

लेकिन खेल की व्यवस्था करने वाले प्रशासन द्वारा खेल का प्रचार प्रसार करने में असमर्थता देखी गयी है और अंत में सारा ज़िम्मा क्रिकेट (Cricket) पर डाल दिया जाता है। इंडियन सुपर लीग ने फुटबॉल के लिए एक भारी भीड़, नये दर्शक और विश्वव्यापी प्रायोजकों का रेखा-चित्र तैयार किया था। लेकिन क्या यह कभी भी क्रिकेट के उत्साह से मेल खा पाएगा?

फिर भी हम आज कह सकते हैं कि भारत में फुटबॉल के साथ कुछ हो रहा है, एक ऐसा देश जहाँ अलग-अलग क्षेत्रीय लीग मौजूद हैं लेकिन सभी की एक ही मांग है- हमारे बुनियादी ढांचे में सुधार, हमारे खिलाड़ियों को बेहतर बनाना है।

संदर्भ:
1.http://epaperbeta.timesofindia.com/Article.aspx?eid=31816&articlexml=ET-SPORTING-FREEDOM-All-is-not-Lost-08082017021006
2.https://www.theguardian.com/cities/2014/nov/27/india-cricket-football-sport-isl-mumbai-kolkata
3.https://www.tandfonline.com/doi/abs/10.1080/14660970600907725?src=recsys&journalCode=fsas20
4.https://www.pressreader.com/india/the-economic-times/20140609/282278138393968
5.चित्र स्रोत- अखिल भारतीय फुटबॉल संघ (AIFF)



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