Machine Translator

महुआ- भारतीय मक्खन का पेड़

रामपुर

 20-05-2018 11:07 AM
पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

महुआ एक अत्यंत महत्वपूर्ण वृक्ष है यह अनेकों प्रकार से मानवों द्वारा प्रयोग में लाया जाता है। महुआ एक ऐसा पेड़ है जो कि रात के समय में फूलता है और सभी जगह पर अपनी खुशबू बिखेर देता है। इसका फूल सुबह होते ही अपने आप ही जमीन पर गिरने लगता है। महुआ के पुष्प को खाने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। इससे कई प्रकार के पकवान बनाये जाते हैं जिनमें से एक है बरिया। बरिया वड़ी की तरह दिखाई देती है परन्तु यह तीखी न होकर मीठी होती है। महुआ के पुष्प को सुखा कर इसको कई धार्मिक कार्यों में प्रयोग में लाया जाता है। महुआ के पुष्प को छट पूजा में प्रयोग में लाया जाता है। इसके पुष्प से शराब भी बनायीं जाती है। महुआ का फल भी अपने में अत्यंत महत्वपूर्ण है जिसका प्रयोग तेल बनाने के लिए किया जाता है। गावों में लोग महुआ के फल को बीनकर उसे छीलकर धूप में रखते हैं सूखने के बाद इसको कोल्हू में चलाकर तेल निकाला जाता है। महुआ का तेल कई कार्यों में प्रयोग में लाया जाता है। इसका तेल खाने के योग्य भी होता है। महुआ के तेल के कई आयुर्वेदिक फायदे भी होते हैं। इसका तेल मक्खन की तरह जम जाता है इसी कारण इसे भारतीय मक्खन का पेड़ भी बुलाया जाता है। महुआ का पुष्प कई लोगों के प्रमुख भोज के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है।

महुआ एक भारतीय मूल का पेड़ है। यह उत्तरभारत और मध्यभारत के समतल इलाकों में बहुतायता से पाया जाता है। महुआ का वैज्ञानिक नाम मधुका लातिफोलिया या बास्सिया लातिफोलिया है। बास्सिया नाम फ़र्नांडो बास्सिया के नाम से आया है जो कि इटली के बोलोनिया वानस्पतिक उद्यान में एक संरक्षक थे। लातिफोलिया का अर्थ है चौड़े पत्ते वाला। महुआ उत्तर प्रदेश में बहुतायत से पाया जाता है। कारण की यहाँ का माहौल महुआ के पेड़ों के लिए अत्यंत सुगम है। महुआ भारत भर में पश्चिमी बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, मध्यप्रदेश, केरल, गुजरात, उड़ीसा और तमिलनाडू में पाया जाता है।

महुआ के पत्ते एक जुट होकर टहनी के अंत में पाए जाते हैं। छोटे पत्ते हल्के लाल रंग के होते हैं और ये फरवरी से मार्च के महीने में आते हैं। महुआ का फूल क्रीम रंग का होता है तथा आकार में यह आधे इंच का होता है। यह फरवरी से अप्रैल के मध्य में पेड़ पर लगता है। यह वह दौर होता है जब पेड़ पूर्णरूप से पत्ता विहीन होता है। यह भी माना जाता है कि जब महुआ में पत्ता ज्यादा होते हैं तो उसमें पुष्प कम लगेंगे। महुआ से सम्बंधित कई लोक गीत भी मध्य और पूर्वी भारत में प्रचलित हैं। उत्तर प्रदेश में एक और धारणा है कि जब महुआ के पेड़ से पुष्प न गिर रहा हो तो उसके तने को गोबर से गोंठा जाता है जिससे महुआ पुष्प तेजी से और ज्यादा मात्रा में गिराता है। रामपुर में महुआ बड़े पैमाने पर पाया जाता है और यहाँ पर लोग बड़ी संख्या में महुआ का प्रयोग करते हैं।

1. फ्लावरिंग ट्रीज़, एम. एस. रंधावा
2. https://en.wikipedia.org/wiki/Madhuca_longifolia



RECENT POST

  • भारत के अनाथालयों में बच्चों की बढ़ती संख्या एक गंभीर मुद्दा
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     26-06-2019 12:40 PM


  • क्या है बीटलविंग कला
    तितलियाँ व कीड़े

     25-06-2019 11:30 AM


  • विश्‍व में आठवां सबसे बड़ा नियोक्‍ता भारतीय रेलवे
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     24-06-2019 11:59 AM


  • क्रिकेट विश्व कप में भारत के कुछ यादगार लम्हे
    हथियार व खिलौने

     23-06-2019 09:15 AM


  • रामपुर की जामा मस्जिद एवं भारत की विभिन्‍न मस्जिदों में सौर घडि़यों की भूमिका
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     22-06-2019 11:45 AM


  • योग का एक अनोखा रूप - कुंडलिनी योग
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     21-06-2019 10:40 AM


  • रुडयार्ड किपलिंग की कविता में रोहिल्ला युद्ध का वर्णन
    ध्वनि 2- भाषायें

     20-06-2019 11:36 AM


  • टी-शर्ट का इतिहास
    स्पर्शः रचना व कपड़े

     19-06-2019 11:15 AM


  • पाकिस्‍तान में अभी भी जीवित हस्‍त कशीदाकारी
    स्पर्शः रचना व कपड़े

     18-06-2019 11:10 AM


  • क्‍या है लाल मांस और सफेद मांस के मध्‍य भेद?
    शारीरिक

     17-06-2019 11:13 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.