Machine Translator

फारस, अरब और यूरोप में पंचतंत्र के दो हजार वर्षों में प्रभाव

रामपुर

 06-05-2018 11:37 AM
धर्म का उदयः 600 ईसापूर्व से 300 ईस्वी तक

पंचतंत्र की कहानियां भारत ही नहीं बल्कि विश्वभर में प्रचलित हैं, इनका नाम विभिन्न स्थानों पर अलग है परन्तु ये कहानियां एक ही हैं। पंचतंत्र भारतीय साहित्य की एकमात्र किताब है जिसे कई भाषाओँ में विश्वभर में अनुवादित किया गया है। ये कहानियां 3सरी शताब्दी ईसा पूर्व में श्री विष्णु शर्मा द्वारा लिखी गईं थी। प्राचीन काल में विश्व भर से कई विदेशी भारत में व्यापार करने के लिए आते रहे हैं और यही कारण है कि यह कहानियां व्यापारियों द्वारा विश्व के अलग-अलग देशों में पहुंची। पंचतंत्र की किताबों को विभिन्न भाषाओँ में छापा व पाण्डुलिपि के रूप में तैयार किया गया था। इन पांडुलिपियों में कई चित्रों आदि को भी बनाया जाता था जिससे व्यक्ति इनको देखकर भी समझ जाये।

रामपुर की रज़ा लाइब्रेरी में भारत के मध्ययुगीन राजाओं की कई खूबसूरत (और सचित्र) पांडुलिपियाँ फारसी में संग्रहित हैं। इनमें से पशु कथाओं की दुर्लभ पांडुलिपियां भी हैं, जो संस्कृत पंचतंत्र से प्रेरित हैं। पंचतंत्र, संस्कृत संस्करण से लगभग अपरिवर्तित हैं और आज भी फारसी भाषी देशों (ईरान / अफगानिस्तान) में अनवर-ए-सुहेली (कैनोपस की रोशनी) के रूप में लोकप्रिय है। अरब में, "कलिला वा दीमन" के रूप में, जहां कालीलाह और दीमन वास्तव में पहली पंचतंत्र कथा-'कार्तका और दमनका' में दो लोमड़ी के संस्कृत नाम हैं। यूरोप में, यूनानी एसोप के तथ्यों में कम से कम 14 पंचतंत्र कथाएं शामिल हैं। यह काम छठी शताब्दी से आज तक कई अलग-अलग संस्करणों और अनुवादों से गुजर चुका है। मूल भारतीय संस्करण का पहली बार बोर्ज़ुया द्वारा 570 ईसा पूर्व में एक विदेशी भाषा में अनुवाद किया गया था, फिर 750 में अरबी में अनुवाद किया गया था। इस अरबी संस्करण का अनुवाद सिरीक, ग्रीक, फारसी, हिब्रू और स्पेनिश समेत कई भाषाओं में किया गया था, और इस प्रकार 1787 में संस्कृत हितोपदेश चार्ल्स विल्किन्स द्वारा अंग्रेजी अनुवाद किया गया।

इस प्रकार से हम देख सकते हैं कि किस प्रकार से भारत से निकले पंचतंत्र ने विश्व भर के साहित्य में अपना स्थान बना लिया। रामपुर में रखी प्रति कई चित्रों को अपने में समाहित किये हुए है जिसे देख कर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस कहानी को किस प्रकार से महत्ता से सजाया व संवारा गया था।

1.https://ipfs.io/ipfs/QmXoypizjW3WknFiJnKLwHCnL72vedxjQkDDP1mXWo6uco/wiki/Panchatantra.html
2.https://books.google.co.in/books?id=Ucz06oE4YyEC&printsec=frontcover&dq=panchtantra&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwijxbXYouXaAhWBPY8KHYI6CZMQ6AEIMTAB#v=onepage&q&f=false



RECENT POST

  • रामपुर में स्थित है भारत का पहला लेज़र नक्षत्र-भवन
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     22-08-2019 02:23 PM


  • दु:खद अवस्था में है, रामपुर की सौलत पब्लिक लाइब्रेरी
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     21-08-2019 03:40 PM


  • क्यों कहा जाता है बेल पत्थर को बिल्व
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     20-08-2019 01:37 PM


  • देश में साल दर साल बढ़ती स्‍वास्‍थ्‍य चिकित्सा लागत
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     19-08-2019 02:00 PM


  • क्या होता है, सकल घरेलू उत्पाद (GDP)
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     18-08-2019 10:30 AM


  • कैसे पड़ा हिन्‍द महासागर का नाम भारत के नाम पर?
    समुद्र

     17-08-2019 01:54 PM


  • रामपुर नवाब के उत्तराधिकारी चुनाव का संघर्ष चला 47 साल तक
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     16-08-2019 05:47 PM


  • अगस्त 1942 को गोवालिया टैंक मैदान में ध्वजारोहण के बाद की अनदेखी छवियाँ
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     15-08-2019 08:16 AM


  • सहयोग व रक्षा का प्रतीक हैं पर्यावरण अनुकूलित हस्तनिर्मित राखियां
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     14-08-2019 02:41 PM


  • रामपुर पर आधारित भावनात्मक इतिहास लेखन
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     13-08-2019 12:44 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.