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1924 की भूली हुई किताब

रामपुर

 27-04-2018 01:36 PM
सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

भारतीय संगीत पर एक मुस्लिम और एक यहूदी जोड़े के द्वारा एक बेहद खूबसूरत किताब लिखी गई थी। यह दोनों मुहम्मद अली जिन्नाह के मित्र थे और 1947 में पाकिस्तान चले गए। इनकी लिखी गई किताब आज रज़ा पुस्तकालय में है और आज भी इसपर शोध किया जा रहा है। यह किताब 1914 में अंग्रेजी भाषा में छापी गई थी। यह किताब अतिया फैज़ी द्वारा लिखी गई थी और बाकी के 13 चित्रण जिनमें भारतीय राग समझाए गए हैं, उन्हें इनके पति के द्वारा बनाया गया था जिन्हें चित्र में बाईं और दाईं ओर दर्शाया गया है। यह सभी चित्रण मुग़ल साम्राज्य के चित्रों के ऊपर आधारित हैं और अभी रज़ा पुस्तकालय में मौजूद हैं। अतिया के पति सम्युएल फैज़ी रहमान पुणे के निवासी थे और इन्होने शादी के बाद इस्लाम मज़हब कुबूल कर लिया था।

जोड़े का मुहम्मद अली जिन्नाह से सम्बन्ध- अतिया अपने समय की एक प्रसिद्ध लेखिका थीं। मुहम्मद अली जिन्नाह के निवेदन पर अतिया बेगम के पति सम्युएल ने पाकिस्तान आने से पहले इस्लाम धर्म को कुबूल किया था। पाकिस्तान में दोनों आवान-ए-रिफ्फ़त में रहते थे। उनका यह मकान कराची के आर्ट कौंसिल के बगल में था। अतिया और स्म्युएल दुनिया में एक लेखक जोड़े के नाम से प्रसिद्ध हो गए। अतिया को हिन्द की बुलबुल कहा जाने लगा और वहीं सरोजिनी नायडू को भारत की बुलबुल कहा जाता था, दोनों कवियित्रियां एक सामान्य ही थीं और इसलिए उन्हें इस नाम से नवाज़ा गया था। सरोजिनी नायडू भारत में काफ़ी प्रसिद्ध थीं लेकिन अतिया बेगम पाकिस्तान में अपना कोई प्रभाव नहीं दिखा पायीं।

लन्दन में पढ़ी अतिया ने काफी दुनिया घूमी और साथ ही उस समय के सबसे शिक्षित वर्ग के कुछ लोगों जैसे अल्लामा इकबाल, शिबली नौमानी, अब्दुल हफीज़ जलंधरी और यहाँ तक कि रामपुर के मौलाना मुहम्मद अली जौहर का दिल जीत लिया था।

अतिया बेगम और इकबाल की कहानी- इकबाल ने सियालकोट में जन्म लिया था और 10 साल बाद वहां से हजारों मील दूर अतिया ने इस्तांबुल में जन्म लिया था। अतिया और इकबाल दोनों के पिता व्यापारी थे, कुछ सालों के बाद अतिया का परिवार बेहतर व्यवसाय के लिए तुर्की से भारत आ गया। 1906 में आगे की पढ़ाई करने के लिए अतिया और इकबाल इंग्लैंड गए और वहीं इन दोनों का मिलन हुआ। वे दोनों बहुत सालों तक साथ रहे फिर दोनों बिछड़ गए। मुहम्मद इकबाल को सरोजिनी नायडू द्वारा एशिया का कविता पुरस्कार विजेता का ख़िताब दिया गया।

अतिया को आवंटित किये गए घर आवान-ए-रिफ्फ़त में संगीत, नृत्य और कला पर लिखी हजारों किताबों से भरा एक पुस्तकालय भी था। अतिया द्वारा कराची नगर निगम के साथ एक अनुबंध किया गया था जिसके तहत आवान-ए-रिफ्फ़त सरकारी अधिकार क्षेत्र में आता है। अतिया ने इस स्थान को एक सांस्कृतिक परिसर में बदलने पर ज़ोर डाला था। परन्तु उनका यह सपना आज तक पूरा न हो पाया है। पढ़ाई के सिलसिले में विदेश घूमने वाली पहली कुछ महिलाओं में से एक अतिया की एक दुखद मौत हुई जब उनके साथ कोई भी मौजूद नहीं था। हालांकि वे एक मेहमान के रूप में पाकिस्तान गईं परन्तु उनकी यादों को कभी सम्मानित नहीं किया गया और उनके किये कई काम आज भी आवान-ए-रिफ्फ़त में कुछ संदूकों में बंद हैं।

1. https://archive.org/details/cu31924022492338
2. https://tribune.com/pk/story/21037/from-royalty-to-oblivion/
3. https://www.geni.com/people/Atiya-Fyzee-Rahamin/60000000111357203705
4. https://www.thedailystar.net/literature/iqbal-and-atiya-begum-1206301



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