Machine Translator

विवर्तनिक प्लेटें

रामपुर

 11-04-2018 12:09 PM
पर्वत, चोटी व पठार

विवर्तनिक प्लेटें विशाल और अनियमित ठोस पत्थर से बनी हैं और इन्हें लिथोस्फेरिक (Lithospheric) प्लेटें भी कहा जाता है क्योंकि यह महाद्वीपी और समुद्री स्थलमंडल (Lithosphere) से बनती हैं। यह प्लेट कई हज़ार मीलों तक फैली हुई होती हैं; और इनमें पैसिफिक (Pacific) प्लेटें और अंटार्कटिक (Antarctic) प्लेटें सबसे बड़ी हैं। प्लेटों की चौड़ाई भी काफ़ी ज्यादा होती है, यह समुद्री स्थलमंडल में 15 किलोमीटर से कम होती हैं और प्राचीन महाद्वीपी स्थलमंडल में 200 किलोमीटर होती हैं। सवाल यह उठता है कि यह विशाल प्लेटें अत्यधिक भारी होने के बावज़ूद तैरती कैसे हैं?

यह पत्थरों के सम्मलेन से होता है। महाद्वीपी क्रस्ट (Crust) ग्रेनाइट(granite) पत्थरों के सम्मलेन से बने हुए हैं जो कि बेहद कम वज़न के खनिज जैसे कि क्वार्टज़ (Quartz) और फेल्डस्पार (Feldspar) से बने होते हैं। जबकि समुद्री क्रस्ट बसाल्टिक (Basaltic) पत्थरों से बने हुए होते हैं, यह पत्थर भारी और घने होते हैं जिसके कारण इन प्लेटों की चौड़ाई काफ़ी बढ़ जाती है। विश्व में बहुत से विवर्तनिक प्लेटें हैं लेकिन इनमें सात प्लेटें काफी महत्वपूर्ण हैं,

यह प्लेटें हज़ारों मील तक फैली हैं :
पैसिफिक प्लेट - 103,300,000 स्क्वायर कि.मी.
उत्तरी अमेरिकी प्लेट - 75,900,000 स्क्वायर कि.मी.
यूरेशियन प्लेट- 67,800,000 स्क्वायर कि.मी.
अफ्रीकी प्लेट - 61,300,000 स्क्वायर कि.मी.
इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट- 58,900,000 स्क्वायर कि.मी.

हर साल या कुछ सालों के अंतराल में विवर्तनिक प्लेटों में बदलाव आता है; यह प्लेटें अपनी जगह से खिसकने लगती हैं और इससे भूकंप, सुनामी और वातावरण में बदलाव आते हैं। जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं तब क्रस्ट पर बहुत विशाल भूकंप होते हैं, सुनामी आती है और ज्वालामुखी भी जागरूक हो जाती है। 1973 में यूरेशियन प्लेट में आए बदलाव से विशाल ज्वालामुखी फूट गई थी जिससे बहुत तबाही मची। ऐसी ही घटना 2015 में नेपाल में हुई थी , नेपाल में 7.8 मैग्नीट्यूड (Magnitude) का भूकंप महसूस किया गया था और इस भूकंप का कारण भारतीय और यूरेशियन प्लेट में टकराव होना था। विवर्तनिक प्लेटों में टकराव और बदलाव तीन तरीकों से होता है;

1- जब प्लेटें फैलती हैं तब क्रस्ट एक दूसरे से अलग हो जाते हैं और इन्हें डाईवर्जेंट मार्जिन (Divergent Margin) कहते हैं, इसमें समुद्री स्थल्मंडल की बनावट होती है।
2- जब प्लेटें फैलती है तब क्रस्ट एक दुसरे की और खिसकती हैं और इसे कॉनवर्जेंट मार्जिन (Convergent Margin) कहते हैं, इससे समुद्री स्थल्मंडल तबाह हो जाता है।
3- जब प्लेटों में हलकी फिसलन होती है तब क्रस्ट अलग दिशाओं में खिसकता है और इसे ट्रांसफॉर्म मार्जिन (Transform Margin) कहते हैं, इससे स्थल्मंडल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

1. इंडिका प्रणय लाल
2. www.geologyin.com
3. प्लेट टेक्टॉनिक, मार्टिन मेशेडे



RECENT POST

  • रुडयार्ड किपलिंग की कविता में रोहिल्ला युद्ध का वर्णन
    ध्वनि 2- भाषायें

     20-06-2019 11:36 AM


  • टी-शर्ट का इतिहास
    स्पर्शः रचना व कपड़े

     19-06-2019 11:15 AM


  • पाकिस्‍तान में अभी भी जीवित हस्‍त कशीदाकारी
    स्पर्शः रचना व कपड़े

     18-06-2019 11:10 AM


  • क्‍या है लाल मांस और सफेद मांस के मध्‍य भेद?
    शारीरिक

     17-06-2019 11:13 AM


  • एक पिता का अंतिम सम्मोहन
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     16-06-2019 10:30 AM


  • दोषों की विषमता ही रोग है और दोषों का साम्य आरोग्य
    व्यवहारिक

     15-06-2019 11:01 AM


  • खेतिहर ग्रामीणों के शोषण और संघर्ष को दर्शाती पुस्तक एवरीबडी लव्स अ गुड ड्रौट
    ध्वनि 2- भाषायें

     14-06-2019 11:06 AM


  • रामपुर का ऐतिहासिक रामपुर क्लब, इसका पतन,एवं रामपुर के अन्य क्लब
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     13-06-2019 10:44 AM


  • प्रगतिशील कलाकारों के योगदान से हुआ था आधुनिक कला का जन्म
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     12-06-2019 12:04 PM


  • हर एक मस्जिद में मिलेंगे आपको ये ख़ास अंग
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     11-06-2019 11:14 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.