हम उपवास क्यूँ रखते हैं?

रामपुर

 28-03-2018 11:16 AM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

ज्यादातर श्रद्धालू भारतीय नियमित रूप से या त्यौहारों जैसे विशेष अवसरों पर उपवास रखते हैं। इस प्रकार वे दिन भर कुछ भी नहीं खाते। पूरे दिन में मात्र एक बार ही कुछ विशेष प्रकार का भोजन, फल का ही आहार करते हैं।

उपवास एक संस्कृत शब्द है जो कि दो प्रमुख शब्दों के जोड़ से बना है - उप “नज़दीक”+ वास “रहना”। इस प्रकार से उपवास का अर्थ है ईश्वर के नज़दीक मानसिक व अध्यात्मिक रूप से रहना। अब यह प्रश्न उठता है कि उपवास का भोजन से क्या सम्बन्ध है?

हम मनुष्यों का बहुत सारा समय खाने के बारे में सोचने, उसकी तैय्यारी करने और उसको बनाने और खाने के बाद पचाने में जाता है। कुछ ऐसे भी भोजन हैं जो दिमाग की गति को क्षीण करने का भी कार्य करते हैं। तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति इस पूरी क्रिया में एक दिन का समय लेता है। जब वह या तो बहुत ही हल्का खाना खाता है या खाता ही नहीं है तब वह अपना समय व ऊर्जा दोनों की बचत करता है। इससे व्यक्ति का दिमाग सतर्क और शुद्ध होता है और वह खाना बनाने और खाने के विचार से दूर रहता है जिससे वह उत्तम विचार और ईश्वर के समीप रहता है। यह एक स्वयं द्वारा अपनाया गया विचार होता है तथा व्यक्ति इससे अनुशासित और आनंदित रहता है।

इसके अलावा व्यक्ति के शरीर को एक विराम मिलता है और वह अपने कार्य को पुनः तीव्र गति से शुरू करता है। शरीर की पाचन क्रिया के लिए भी उपवास का अपना एक महत्व है।

हम अपनी इन्द्रियों को जितना बढ़ाते हैं वो उतना ही और बढ़ने की मांग करती हैं। उपवास हमारी इंद्रियों पर नियंत्रण करने, अपनी इच्छाओं को उजागर करने और हमारे दिमाग का मार्गदर्शन करने में मदद करता है। उपवास ऐसा होना चाहिए जो शरीर को कमजोर न करे और शरीर चिड़चिड़ा ना हो अन्यथा उपवास का कोई महत्व नहीं रह जाता है।

भगवद् गीता हमें उचित खाने के लिए आग्रह करती है - न तो बहुत कम और न ही बहुत ज्यादा युक्त-अहार और सरल, शुद्ध और स्वस्थ भोजन (एक सात्विक आहार) खाने के लिए। जब हम उपवास न करते हों तब भी हमें इसका पालन करना चाहिए।

1. इन इंडियन कल्चर व्हाई डू वी... – स्वामिनी विमलानान्दा, राधिका कृष्णकुमार



RECENT POST

  • अध्यात्म और गणित एक ही सिक्के के दो पहलू हैं
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     21-05-2022 11:15 AM


  • भारत में प्रचिलित ऐतिहासिक व् स्वदेशी जैविक खेती प्रणालियों के प्रकार
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     20-05-2022 09:59 AM


  • भारत के कई राज्यों में बस अब रह गई ऊर्जा की मामूली कमी, अक्षय ऊर्जा की बढ़ती उपलब्धता से
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     19-05-2022 09:42 AM


  • मिट्टी के बर्तनों से मिलती है, प्राचीन खाद्य पदार्थों की झलक
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     18-05-2022 08:44 AM


  • काफी हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है संपूर्ण विश्व में बुद्ध पूर्णिमा
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-05-2022 09:46 AM


  • तीव्रता से विलुप्‍त होती भारतीय स्‍थानीय भाषाएं व् उस क्षेत्र से संबंधित ज्ञान का भण्‍डार
    ध्वनि 2- भाषायें

     17-05-2022 02:11 AM


  • जलीय पारितंत्र को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, शार्क
    व्यवहारिक

     15-05-2022 03:26 PM


  • क्या भविष्य की पीढ़ी के लिए एक लुप्त प्रजाति बनकर रह जाएंगे टिमटिमाते जुगनू?
    तितलियाँ व कीड़े

     14-05-2022 10:07 AM


  • गर्मियों में रामपुर की कोसी नदी में तैरने से पूर्व बरती जानी चाहिए, सावधानियां
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     13-05-2022 09:35 AM


  • भारत में ऊर्जा खपत पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए नीति और संरचना में बदलाव
    जलवायु व ऋतु

     11-05-2022 09:05 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id