जीवाणु: जिंदगी देनेवाले या लेनेवाले?

रामपुर

 08-03-2018 01:23 PM
कीटाणु,एक कोशीय जीव,क्रोमिस्टा, व शैवाल

जीवाणु ऐसे जीव हैं जो पृथ्वी पर उत्पत्ति से लेकर आज तक मौजूद हैं। मान्यता है कि ये पृथ्वी के प्रथम जीवों में से एक हैं और उनमें से कुछ प्रकार उत्पत्ति से लेकर आज भी उसी रूप में हैं बिना किसी बदलाव के। मानव ने शुरुवात से ही सजीव प्राणी एवं पशु को वर्गीकृत करने की कोशिश की है। शुरुवात में जीवाणुओं को एइच्लेर द्वारा पादप जगत के क्रिप्टोगैम (Cryptogams) इस समूह में जिसमें प्रजनन बीजाणुओं की सहायता से होता है रखा गया। आज इन्हें असीमकेंद्रकी (प्रोकर्योटिक: Prokaryotic) इस समूह में रखा गया है। जीवाणु एककोशीय, कोशिका भित्तियुक्त, अकेंद्रिक सरल जीव होते हैं जो बहुतायता से परपोषी होते हैं और इनकी प्रजनन विधि संयुग्मन प्रकार की होती है। यह जीव प्राय: सर्वत्र पाए जाते हैं जैसे मिट्टी, जल, वायु यहाँ तक की पौधों एवं मानव आदि पशुओं के शरीर में भी। अचम्भे की बात है कि ये सूक्ष्मदर्शी जीव जिन्हें हम खुली आँखों से नहीं देख पाते, संसार के बायोमास (Biomass) का ये एक अहम और बहुत बड़ा हिस्सा हैं; पशु-वनस्पति से भी बड़ा, पृथ्वी पर लगभग 5×1030 जीवाणु मौजूद हैं।

जीवाणुओं को पहली बार डच वैज्ञानिक एण्टनी वाँन ल्यूवोनहूक ने अपने एकल लेंस सूक्ष्मदर्शी यंत्र से देखा लेकिन उन्होंने इसे सिर्फ किसी प्रकार का जंतुक समझा था। 18वीं शताब्दी में लुइ पाश्चर एवं कोख (जीवाणुअध्ययन क्षेत्र के युगपुरुष) इन वैज्ञानिकों के मुताबिक जीवाणु रोग फैलाते हैं यह अनुमान निकला गया, जैसे टीबी, त्वचारोग आदि लेकिन बैक्टिरियोलोजी (Bacteriology), जीवाणुओं की अध्ययन शाखा के अनुसार सभी जीवाणु रोगकारक नहीं होते इस अनुमान को पुष्टि मिली। रोगकारक जीवाणुओं के लिए प्रतिजैविक का प्रथम आविष्कार पॉल एह्रलीच ने सिफिलिस (syphilis) रोग की चिकित्सा के लिए किया था जिसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार भी मिला।

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि जीवाणु सिर्फ रोग कारक नहीं होते बल्कि वे सहाय्यकारक भी होते हैं। किण्वन प्रक्रिया से ऐसे बहुत से जीवाणु हैं जिनके बिना मनुष्य का शरीर ठीक से काम ही नहीं कर पायेगा। मनुष्य शरीर में मानव कोशिकाओं के मुकाबले 30% ज्यादा जीवाणु कोष होते हैं जो ज्यादातर त्वचा एवं आहार-नाल में पायें जाते हैं। इ. कोलाय (E. Coli) यह आहार-नाल में पाए जाने वाला जीवाणु ‘विटामिन के’ (Vitamin K) का एकमात्र स्त्रोत है जो मनुष्य को और कहीं से नहीं मिलता। ‘विटामिन के’ पाचन में मदद करने के साथ-साथ चोट लगने से होने वाले रक्तस्राव को रोकने में भी मदद करता है।

ज्यादा मात्रा में जीवाणु बढ़ने से ये रोगकारक तो होते हैं लेकिन इनके वजह से होने वाले रोगों के विविध लक्षण के जरिये रोग सूचक का भी काम करते हैं। इस बात से साफ़ जाहिर है कि जीवाणु रोगकारक भी हैं और रोग से मुक्त करने वाले भी।

1. रिफ्रेशर कोर्स इन बॉटनी: सी एल सॉवह्ने
2. जीवजगत का वर्गीकरण, एनसीईआरटी https://biologyaipmt.files.wordpress.com/2016/06/ch-23.pdf
3. जनरल साइंस: डॉ. लाल एंड जैन
4. https://hi.wikipedia.org/wiki/जीवाणु



RECENT POST

  • क्या है एसिड रेन या अम्ल वर्षा?
    जलवायु व ऋतु

     22-01-2019 02:43 PM


  • भारत के अद्भुत उपग्रह प्रक्षेपण वाहन
    संचार एवं संचार यन्त्र

     21-01-2019 02:00 PM


  • उम्मीद का एक सन्देश
    ध्वनि 2- भाषायें

     20-01-2019 10:00 AM


  • सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है दिल के दौरे का खतरा
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     19-01-2019 12:56 PM


  • कैसे होता है परमाणु ऊर्जा का उत्पादन?
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     18-01-2019 12:05 PM


  • आप भी जाने कैसे बनाए जाते है भूकंपरोधी मकान
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     17-01-2019 01:52 PM


  • क्या है कृत्रिम बुद्धिमत्ता या आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस?
    संचार एवं संचार यन्त्र

     16-01-2019 12:43 PM


  • उमंग एप के माध्‍यम से सरकारी विभाग अब आपके हाथ में
    संचार एवं संचार यन्त्र

     15-01-2019 02:45 PM


  • क्या है मकर संक्रांति और क्यों उड़ाते हैं हम इस दिन पतंग?
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-01-2019 11:07 AM


  • देश के आज़ाद होने के पहले वर्ष पूर्ण होने पर सरदार पटेल का भाषण
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     13-01-2019 10:00 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.